चंद्रमा के बाद अब सूरज के तेजोमंडल में उड़ान भरने को तैयार है भारत

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चैतन्य भारत न्यूज

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) मिशन चांद के बाद अब जल्द ही मिशन सूर्य की ओर अपने कदम बढ़ाने वाला है। हाल ही में आईआईटी-आईएसएम के इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनिरिंग के रिसर्च स्कॉलर सह इसरो वैज्ञानिक धरवेंद्र यादव ने बताया कि, ‘इसरो चांद के बाद ‘आदित्य मिशन’ के तहत सूरज पर जाने की तैयारी कर रहा है।’


मिशन आदित्य-एल 1 का लक्ष्य

जानकारी के मुताबिक, मिशन चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण के बाद अब इसरो पर सूर्य के बारे में खोजबीन करने को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, मिशन आदित्य-एल 1 के तहत इसरो सूर्य मंडल की परत फोटोस्फीयर व क्रोमोस्फीयर का अध्ययन करेगा। इस मिशन में सूर्य से निकलने वाले विस्फोटक कणों पर भी शोध होगा।

ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए यह मिशन खास 

बता दें सूर्य की बाहरी परत को तेजोमंडल कहा जाता है। यह हजारों किलोमीटर दूर तक फैली होती हैं। इसरो का आदित्य-एल 1 पृथ्वी से 1.5 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर जाकर स्थित होगा और वह वहां से हमेशा सूर्य पर नजर रखेगा। दुनियाभर में ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ती जा रही है। इसकी चुनौतियों से निपटने के लिए इसरो इस खास मिशन पर काम करेगा।

अंतरिक्ष में इंसान भेजेगा इसरो

इसरो के वैज्ञानिक इन दिनों मिशन गगनयान पर भी काम कर रहे हैं। यह मिशन भी इसरो के सबसे खास मिशनों में से एक है, क्योंकि इसरो पहली बार इस मिशन के तहत इंसान को अंतरिक्ष में भेजेगा। जानकारी के मुताबिक, इस मिशन में इसरो तीन भारतीय लोगों को अंतरिक्ष में सात दिन की यात्रा के लिए भेजेगा। मिशन गगनयान के तहत अंतरिक्ष में भेजने वाले यात्रियों के चयन का पहला चरण पूरा हो गया है। अंतरिक्ष यात्रियों के चयन की प्रक्रिया इंस्टीट्यूट ऑफ एयरस्पेस मेडिसिन भारतीय वायुसेना द्वारा पूरी की जा रही है।

2022 तक अंतरिक्ष में जाएंगे भारतीय 

बताया जा रहा है कि इसरो साल 2022 तक यात्रियों को अंतरिक्ष भेज देगा और फिर उन्हें वापस लेकर आएगा। इस मिशन पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्री अलग-अलग प्रकार के माइक्रो ग्रेविटी टेस्ट को अंजाम देंगे। मिशन गगनयान भारत की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की क्षमता का अहसास दुनिया को कराएगा।

 

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