अधिकारियों और उनकी पत्नियों को फिट रखने के लिए ITBP-BSF शुरू करेगा ‘तोंद रहित-2020 मिशन’ और ‘दंपती तंदुरुस्ती पाठ्यक्रम’

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. एक दिन में 100 किमी पैदल मार्च कर ‘फिट इंडिया’ का अभियान चलाने वाले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 58 वर्षीय महानिदेशक (डीजी) एसएस देसवाल जल्द ही एक और अभियान शुरू करने जा रहे हैं। उनके इस नए मिशन का नाम है ‘तोंद रहित 2020’। इस मिशन में जवानों को तो चुस्त-तंदरुस्त रहने के लिए ट्रेनिंग दी ही जाएगी और साथ ही अधिकारियों और उनकी पत्नियों को भी फिट रहने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।

‘दंपति तंदुरुस्ती पाठ्यक्रम’ (Couple fitness course) नामक बल की यह पहल देशभर में फैले अपने परिसरों में तंदुरुस्ती केंद्रित अवसंरचना स्थापित करने की अनूठी परियोजना का हिस्सा है। आटीबीपी के इस अभियान में चीन से लगी एलएसी पर तैनात आईटीबीपी और पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा पर तैनात बीएसएफ के 3।5 लाख जवानों को शामिल किया जाएगा। दोनों बल ‘तोंद रहित-2020′ मिशन के लिए भी काम कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बल के अधिकारियों और जवानों में मोटापे की समस्या नहीं हो क्योंकि अर्धसैनिक बल की लड़ाकू क्षमता के लिए यह महत्वपूर्ण है।

58 वर्षीय आईटीबीपी महानिदेशक देसवाल ने कहा- ‘हमारे पास देशभर में 70-80 एकड़ के कई परिसर हैं। यहां हम ओपन जिम, वॉकिंग और साइकिलिंग ट्रैक समेत वह सारी बुनियादी सुविधाएं देंगे जिससे हमारे जवान, अधिकारी और उनके परिवार के लोग पूरी तरह से फिट रह सकें। दरअसल, हमारा मकसद यह है कि हमारे जवान, अधिकारी और उनके जीवनसाथी पूरी तरह सेहतमंद हों। खासकर रिटायरमेंट के बाद, जब शरीर ढलने लगता है। हमारे अधिकारी लंबे समय तक परिवारों से अलग रहते हैं और कभी-कभी उनकी सेहत संबंधी परेशानियां भी अनदेखी कर दी जाती हैं, इसलिए यह जरूरी हो गया है कि हम इस तरह के अभियान चरणबद्ध तरीके से लागू करें। इसमें जवानों-अफसरों को दी जाने वाली कड़ी ट्रेनिंग की तुलना में उनकी पत्नियों के लिए हल्के-फुल्के व्यायाम को शामिल किया गया है।

महानिदेशक ने कहा, ‘हमारे अधिकारी अपने परिवार से अलग रहते हैं और कई बार उनके जीवनसाथी के स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसलिए हमने फैसला किया कि अधिकारियों और उनके जीवनसाथी के लिए तंदुरुस्ती पाठ्यक्रम शुरू किया जाए। इस पाठ्यक्रम को जल्द ही बैच में शुरू किया जाएगा।’ देसवाल ने कहा कि, ‘जीवनसाथी के लिए शुरू होने वाले तंदुरुस्ती पाठ्यक्रम पतियों के मुकाबले पत्नियों के लिए थोड़े हल्के होंगे। इस तरह का कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से जवानों के लिए भी शुरू किया जाएगा।’

देसवाल ने कहा कि, ‘चूंकि जीवनसाथी जीवन भर के लिए होता है और खुशहाल जीवन के लिए हमने उनके परिवार को भी इसमें शामिल किया है। मैं देश का ऐसा सिपाही हूं, जो तब सबसे ज्यादा उपयोगी होता हूं, जब देश कोरोना महामारी जैसे संकट में हो।’

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