ये हैं भगवान जगन्नाथ के अंगरक्षक और बाहुबली पुजारी अनिल, 7 बार रह चुके हैं मिस्टर ओडिशा

चैतन्य भारत न्यूज

भुवनेश्वर. ओडिशा में स्थित जगन्नाथपुरी धाम में दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। जितना अनोखा यह मंदिर है उतने ही अनोखे इस मंदिर के पुजारी और सेवक भी हैं। लेकिन मंदिर का एक ऐसा भी सेवक है जो अक्सर ही चर्चाओं में बना रहता है। हम बात कर रहे हैं अनिल गोचिकर के बारे में जिन्हें लोग दूर से भी पहचान सकते हैं। अनिल पुजारी होने के साथ-साथ बॉडी बिल्डर भी हैं। अनिल को सभी लोग भगवान जगन्नाथ महाप्रभु का अंगरक्षक कहते हैं।

 

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सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं अनिल

अनिल बॉडी बिल्डिंग में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में अपना दम-खम दिखा चुके हैं। अनिल बॉडी बिल्डिंग की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दो बार गोल्ड मेडल और एक बार सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। साल 2016 में दुबई में हुई अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में अनिल ने गोल्ड मेडल जीता था। साल 2017 और 2019 में उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप गोल्ड और साल 2018 में सिल्वर मेडल जीता था। वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और हर थोड़े दिन में अपनी तस्वीरें शेयर करते रहते हैं। अनिल की सिक्स पैक एब्स की की तस्वीरें भी सोशल मीडिया में छाई रहती हैं।

पिता भी थे पूरी मंदिर में पुजारी

अनिल ने अपने बड़े भाई दामोदर के लिए बॉडीबिल्डिंग सीखी थी। दामोदर भी बॉडीबिल्डर थे लेकिन पिता के निधन के बाद उन्हें बॉडी बिल्डिंग छोड़ना पड़ी थी। उनके पिता पूरी मंदिर में ही पुजारी थे। अनिल रोजाना मिट्टी के बर्तनों में पका हुआ भोजन ग्रहण करते हैं। वह शुद्ध शाकाहारी हैं। अनिल रोजाना फल, हरी सब्जियां और ताजा अनाज ग्रहण करते हैं। अनिल सात बार मिस्टर ओडिशा भी रह चुके हैं।

मुगलों से अनिल के पूर्वजों ने महाप्रभु की रक्षा

अनिल ने बताया कि, उनके परिवार के लोग कई पीढ़ियों से मंदिर की सेवा में जुटे हुए हैं। मुगलों और अन्य आक्रमणकारियों ने जब श्रीमंदिर पर हमला किया था तो उनके पूर्वजों ने महाप्रभु की रक्षा की थी। महाप्रभु की मूर्ति बहुत भारी होती है इसलिए उन्हें उठाने के लिए उनका बलवान होना अनिवार्य है। इसके लिए वह रोजाना अभ्यास करते हैं। उनके समुदाय के बच्चों को पढ़ाई करने के बाद अखाडा जाना जरुरी होता है। आपको बता दें जगन्नाथ मंदिर पर बाहरी शासकों द्वारा 17 बार आक्रमण किया जा चुका है। हर बार मंदिर के पुजारियों ने भगवान की मूर्ति को छिपाकर हमलावरों से उनकी रक्षा की है।

रथ यात्रा और स्नान यात्रा में मिलती है विशेष जिम्मेदारी

मंदिर के कुल पुरोहित और मंदिर संचालन कमेटी के सदस्य डॉ. सिद्धेश्वर महापात्र ने बताया कि, पूरी मंदिर के सेवायतों में गोचिकर को नायक का दर्जा मिला है। वे प्रतिहारी द्वार रक्षा व सुरक्षा से लेकर पूजा के विधि-विधान में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्हें मंदिर के जय-विजय दरवाजे का मालिक माना गया है। अनिल को रथ यात्रा और स्नान यात्रा के समय सुरक्षा की विशेष जिम्मेदारी सौंपी जाती है। रथयात्रा के दौरान ये रथ के साथ-साथ चलते हैैं और महाप्रभु को रथ तक लाने और फिर रथ से मंदिर ले जाने समेत अन्य कार्यों में भी अहम भूमिका निभाते हैैं।

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