कल से केंद्र शासित प्रदेश बन जाएंगे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, लागू होंगे सैकड़ों नए कानून

jammu kashmir ladakh

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख 31 अक्टूबर यानी गुरुवार से दो नए केंद्र शासित प्रदेश बन जाएंगे। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अब से यहां की आधिकारिक भाषा उर्दू की जगह हिंदी हो जाएगी। बता दें जम्मू-कश्मीर अब तक अकेला ऐसा राज्य था जहां की आधिकारिक भाषा उर्दू थी।



इसी के साथ जम्मू-कश्मीर में आधार समेत करीब 106 नए कानून पहली बार लागू होंगे। बता दें अब तक जम्मू-कश्मीर में विशेष राज्य का दर्जा होने से 153 कानून विशेष रूप से लागू थे, जो अब खत्म हो जाएंगे। 6 अगस्त को संसद से पारित हुए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून, 2019 के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर 114 सीटों की विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश होगा। वहीं बिना विधानसभा वाला लद्दाख सीधे केंद्र से शासित होगा। इसी के साथ भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि जब किसी राज्य को बांटकर दो केंद्र शासित प्रदेश का गठन किया गया है।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के सेक्शन 47 के मुताबिक, नई विधानसभा के गठन के बाद यहां की सरकार किसी एक या इससे ज्यादा भाषाओं को प्रशासन के कामकाज की भाषा चुन सकेगी। इस स्थिति में भी हिंदी के आधिकारिक भाषा के रूप में इस्तेमाल करने का विकल्प बना रहेगा। जबकि विधानसभा का कामकाज निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा तय की गई भाषा या हिंदी या अंग्रेजी में होगा। इसके अलावा राज्य में दो नए रेडियो स्टेशन भी लॉन्च किए जाएंगे।

गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि, 31 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए नियुक्त लेफ्टिनेंट गवर्नर के शपथ ग्रहण कार्यक्रम के साथ ही इस समारोह की शुरुआत होगी। जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल पहले तो श्रीनगर में जी सी मुर्मु को पद और गोपनियता की शपथ दिलाएंगी और फिर वह हेलीकॉप्टर से लेह जाएंगी और वहां राधा कृष्ण माथुर को लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर की शपथ दिलाएंगी।

जम्मू-कश्मीर में लागू होने वाले 106 कानूनों में आधार, मुस्लिम विवाह विच्छेद कानून, शत्रु संपत्ति कानून, मुस्लिम वुमन प्रोटेक्शन एक्ट, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, आरटीआई, शिक्षा का अधिकार, व्हिसल ब्लोअर आदि शामिल हैं। लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश चंंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर पुड्‌डुचेरी के मॉडल की तर्ज पर काम करेगा। बता दें जम्मू-कश्मीर में लेफ्टिनेंट गवर्नर को विधानसभा में दो महिला सदस्य नॉमिनेट करने का अधिकार रहेगा। इसके अलावा विधानसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सीटों की संख्या भी उनकी आबादी के मुताबिक आरक्षित की जाएगी।

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