छात्रा के बाल नहीं थे काले, तो स्कूल ने प्रवेश करने से रोका, अब कोर्ट ने दिया- इतना हर्जाना देने का आदेश

चैतन्य भारत न्यूज

जब भी सबसे अनुशासित देश की बात की जाती है तो जापान का नाम सबसे पहले सामने आता है। यहां के लोगों को सबसे ज्यादा अनुशासनप्रिय माना जाता है। वे नियम-कायदों का पालन करने में पक्के होते हैं। लेकिन एक स्कूल को नियम-कायदों का पालन करना भारी पड़ गया। स्कूल प्रशासन ने एक भूरे बाल वाली छात्रा को प्रवेश नहीं करने दिया। स्कूल ने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि, ‘यदि तुमने अपने बाल काल नहीं करवाए तो स्कूल आने की जरुरत नहीं है।’ इस सख्त रवैये के बाद छात्रा ने स्कूल आना ही बंद कर दिया और फिर उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

छात्रा को दी गई यह चेतावनी

यह मामला जापान के ओसाका प्रांत के हैबीकिनौ का है। यहां कैफुकन प्रांतीय हाई स्कूल में साल 2015 में एक लड़की पढ़ती थी। उसकी उम्र 15 वर्ष थी। उसके बालों का रंग प्राकृतिक रूप से भूरा था। लेकिन स्कूल प्रशासन को लगा कि छात्रा ने अपने बालों में भूरा रंग करवाया है। फिर उन्होंने छात्रा को सख्त चेतावनी दी। दरअसल, जापान के नियमों के अनुसार, सभी बच्चों के बाल प्राकृतिक काले होने चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर जापानियों के बाल प्राकृतिक रूप से काले ही होते हैं।

स्कूल को दिया हर्जाना देने का आदेश

फिर स्कूल प्रशासन ने छात्रा के बालों की जांच करवाई। जांच में छात्रा के बालों की जड़ काले रंग की पाई गई। इसके बाद उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला की छात्रा ने बालों में भूरा रंग करवाया है। स्कूल प्रशासन ने उस छात्रा को स्कूल ट्रिप पर भी आने की अनुमति नहीं दी। तंग आकर आखिरकार उस छात्रा ने स्कूल आना छोड़ दिया। साल 2017 में छात्रा ने इसके खिलाफ कोर्ट में अर्जी दाखिल की। इस मामले पर फैसला आने में चार साल लग गए। छात्रा की उम्र अब 21 साल हो गई है। कोर्ट ने यह आदेश दिया कि छात्रा को स्कूल हर्जाने के तौर पर 3,30,000 येन यानी करीब 2.27 लाख रुपए दे। कोर्ट ने कहा, छात्रा को स्कूल से निकालकर गलत है।

जापान में है ये नियम

बता दें जापान में स्कूली छात्रों को बालों में कलर करवाना या फिर उन पर ब्लीच करवाना मना है। कोर्ट ने यह माना कि, स्कूल ने नियमों का पालन करने की पूरी कोशिश की है लेकिन इससे छात्रा को तनाव हुआ है।

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