हेमंत सोरेन ने दूसरी बार ली झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ, राहुल, ममता समेत ये बड़े नेता हुए शामिल

hemant soren oath ceremony

चैतन्य भारत न्यूज

रांची. प्रदेश की राजधानी रांची में झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। बता दें हेमंत सोरेन झारखंड के 11वें मुख्यमंत्री बने हैं। उन्हें राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू ने मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई है। हेमंत सोरेन के साथ आज तीन और मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें कांग्रेस के विधायक आलमगीर आलम, रामेश्वर उरांव और आरजेडी विधायक सत्यानंद भोक्ता शामिल हैं।


ये बड़े नेता हुए शामिल

यह शपथ ग्रहण समारोह रांची के मोरहाबादी मैदान में हुआ। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव, बिहार के पूर्व उप मूकजयमंत्री तेजस्वी यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भपेश बघेल, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई, कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह, डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन, सांसद टीआर बालू और सांसद कनिमोझी भीरांची समेत कई बड़े नेता शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए।

दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हेमंत सोरेन

साल 1975 में बिहार में जन्में हेमंत सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन के बेटे हैं। हेमंत सोरेन ने इंजीनियरिंग के लिए बीआईटी मेसरा में एडमिशन लिया था लेकिन उनके सामने कुछ ऐसी परिस्थितियां आ गई थी जिसके बाद उन्हें राजनीति में कदम रखना पड़ा। साल 2009 में उनके बड़े भाई दुर्गा सोरेन का निधन हो गया था। दुर्गा के जाने के बाद पार्टी की पूरी जिंदगी हेमंत सोरेन पर आ गई क्योंकि पिता शिबू सोरेन अस्वस्थ्य रहने लगे और बढ़ती उम्र ने भी उन्हें राजनीति से किनारा करने के लिए बाध्य कर दिया। हेमंत सोरेन जून 2009 से 4 जनवरी 2010 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे थे। 2013 में कांग्रेस और आरजेडी की मदद से हेमंत झारखंड के पांचवें मुख्यमंत्री भी बने थे। लेकिन 2014 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद उनकी सत्ता से विदाई हो गई थी। साल 2019 में एक बार फिर सत्ता उनके हाथ में आ गई है।

शपथग्रहण से पहले हेमंत का बड़ा ऐलान

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले हेमंत सोरेन ने कहा कि, ‘एनआरसी लागू करने योग्य नहीं है। पूरा देश नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ मजबूती से खड़ा है। ये तब हो रहा है जब हमारा देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है। हम नोटबंदी की तरह लोगों को एक बार फिर से कतार में नहीं खड़ा कर सकते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘आखिर ऐसे कानून की जरूरत क्या है, नोटबंदी के दौरान कई लोगों की जान गई थी, उसकी जम्मेदारी कौन लेगा? मौजूदा सरकार विरोध की आवाज को पुलिस फोर्स के जरिए दबा रही है। ये लोकतंत्र नहीं है।’

ये हैं चुनाव परिणाम

बता दें झारखंड में 30 नवंबर से 20 दिसंबर तक 5 चरणों में मतदान हुए थे। कुल 65.23% वोटिंग हुई थी। राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) गठबंधन को प्रचंड बहुमत मिला। इस गठबंधन ने 81 में से 47 सीटें जीती हैं। इसमें जेएमएम के खाते में 30, कांग्रेस को 16 और आरजेडी को 1 सीट पर जीत मिली। जबकि जेवीएम को 3, आजसू के खाते में 2 सीटें, सीपीआईएमएल और एनसीपी के खाते में एक-एक सीट गई।

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