जेएनयू : छात्रों के प्रदर्शन के आगे झुकी सरकार, जानें पहले क्या थी और अब कितनी बढ़ी फीस?

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की फीस बढ़ने के बाद भी अन्य संस्थानों के मुकाबले अविश्वसनीय रूप से बेहद कम है, बावजूद इसके छात्र इसे लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रह थे। इनके इसी प्रदर्शन ने सरकार को अपने आगे झुकने को मजबूर कर दिया। आखिरकार मोदी सरकार ने छात्रों की बढ़ी हुई हॉस्टल फीस समेत अन्य फीस में की गई बढ़ोतरी को आंशिक रूप से वापस लेने का फैसला किया। हालांकि, हॉस्टल फीस बढ़ी हुई ही रहेगी।




इसकी जानकारी मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिन आर सुब्रमण्यम ने बुधवार शाम को ट्वीटर के जरिए दी। साथ ही इस फैसले की जानकारी जेएनयू के वाइस चांसलर जगदेश कुमार ने भी दी। उन्होंने कहा, ‘हमने सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए सिंगल सीटर वाले होस्टल रूम की फीस 10 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए करने का निर्णय लिया है जबकि गरीबी रेखा से नीचे वाले छात्रों को इसका 50% जमा करना होगा।’ उन्होंने ड्रेस कोड के बारे में बताया कि अब इससे जुड़ा क्लॉज मैन्युअल का हिस्सा नहीं होगा। जानकारी के मुताबिक, जेएनयू प्रशासन ने हॉस्टल में इस्टैबलिशमेंट चार्जेज, क्रॉकरी और न्यूजपेपर आदि की फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी। लेकिन कमरे के रेंट में भारी बढ़ोत्तरी कर दी। जहां पहले सिंगल सीटर हॉस्टल का रूम रेंट 20 रुपए था, उसे प्रशासन ने बढ़ाकर 600 रुपए कर दिया था, लेकिन अब वह 300 रुपए होगा। वहीं डबल सीटर का रेंट 10 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए कर दिया था, जो अब वह 150 रुपए होगा।

ये था पुराना फीस स्ट्रक्चर

नया फीस स्ट्रक्चर

जानकारी के मुताबिक, जेेएनयू के छात्रों को पहले हॉस्टल सर्विस चार्ज या यूटिलिटी चार्जेज जैसे कि पानी और बिजली के पैसे नहीं देने होते थे। लेकिन प्रशासन द्वारा इसमें बढ़ोतरी की गई थी। प्रशासन ने यूटिलिटी चार्जेज के तौर पर इस्तेमाल के अनुसार बिल का प्रावधान कर दिया गया था। यानी छात्र जितना इस्तेमाल करते उन्हें उतना ही खर्च देना पड़ता। वहीं सर्विस चार्जेज के तौर आईएचए कमेटी ने 1700 रुपए महीने फीस जोड़ दी थी। इसके अलावा प्रशासन ने वन टाइम मेस सिक्योरिटी जो कि पहले 5500 रुपए थी, इसे भी 200 पर्सेंट से ज्यादा बढ़ाकर 12000 रुपए कर दिया था। इसे लेकर ही यूनिवर्सिटी के छात्र लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे थे। बुधवार को एबीवीपी ने भी यूजीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। साथ ही जेेएनयू की फीसवृद्धि के इस पूरे मामले में देशभर के संस्थानों के छात्र संगठन एकजुट होकर जेएनयू के सपोर्ट में आ गए थे। सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने फीस वृद्धि को गलत ठहराया था। हालांकि, कई लोग इसके समर्थन में भी थे।

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