एक धर्मगुरु के कहने पर 900 से भी अधिक लोगों ने कर ली थी सामूहिक आत्महत्या, दिल दहला देगी कहानी

चैतन्य भारत न्यूज

अंधविश्वास एक ऐसा जाल है जिसमे इंसान फंसता ही चला जाता है। आज हम आपको एक ऐसे दिल दहला देने वाले अंधविश्वास के एक ऐसे मामले के बारे में बता रहे हैं, जिसके कारण अमेरिका के पास स्थित गुयाना के जोंसटाउन में एक साथ 900 से भी अधिक लोगों ने आत्महत्या कर ली थी।

इस घटना को अबतक की सबसे बड़ी आत्महत्या की घटनाओं में से एक माना जाता है। 18 नवंबर यानी आज ही के दिन साल 1978 को घटी इस घटना के बारे में जो भी सुनता है हैरत में पड़ जाता है। दरअसल, इस घटना के पीछे जिम जोंस नामक एक धर्मगुरु का हाथ था। वो खुद को भगवान का अवतार बताता था। जिम जोंस ने लोगों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने के लिए जरूरतमंद लोगों की मदद के नाम पर साल 1956 में ‘पीपल्स टेंपल’ (लोगों का मंदिर) नाम का एक चर्च बनाया और अपनी धार्मिक बातों और अंधविश्वास के दम पर उसने हजारों लोगों को अपना अनुयायी बना लिया।

वो शुरुआती दौर में नस्लभेद के खिलाफ बातें करता था जिसके चलते उसके पंथ में कई अफ्रीकी अमेरिकन्स शामिल हुए क्योंकि उस दौर में अमेरिका में ब्लैक लोग अपने अधिकारों के खिलाफ काफी मुखर हो रहे थे। जिम इसके अलावा सिविल राइट्स को लेकर भी काफी मुखर था। उसने कई कलर के बच्चों को गॉड लिया। जिम अपने साथ जुड़े लोगों को ये एहसास दिलाना चाहता था कि युद्ध, डिप्रेशन और तकलीफों से गुजरते अमेरिकियों के लिए एक आदर्श समाज की स्थापना की जा सकती है।

60 और 70 के दशक में अमेरिकी समाज में फैली युगचेतना को जिम ने भी भुनाने की कोशिश की। उन्होंने लोगों के डर और असुरक्षा को देखते हुए वादे किए कि वे एक बेहतर दुनिया बनाने जा रहे हैं जहां हर कोई एक समान होगा। जिम की एक पूर्व फॉलोअर के मुताबिक, वो अपने आपको गांधी, बुद्ध और लेनिन का रूप बताते थे। किसी को एक पिता की जरूरत महसूस होती थी तो उसके साथ वैसे ही बर्ताव करते थे। वे अपने पंथ में मौजूद हर इंसान को उसकी असुरक्षा के हिसाब से सुनिश्चित करते थे।

 

जिम के इस पंथ में ज्यादातर अफ्रीकन अमेरिकन लोग थे, लेकिन इसके अलावा इस ग्रुप में मेक्सिकन, यहूदी और गोरे लोग भी शामिल थे। इन लोगों में कई ऐसे थे जो अनपढ़ थे।वहीं, कई ऐसे भी थे जो काफी एजुकेटेड थे लेकिन सभी एक आदर्श लोक की स्थापना के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे और जिम ने इन्हें जो सपना दिखाया था, उसके लिए जी जान से जुटे थे।

जिम जोंस कम्युनिष्ट विचारधारा का था और उसके विचार अमेरिकी सरकार से अलग थे। इसलिए वो अपने अनुयायियों के साथ शहर से दूर गुयाना के जंगलों में चला गया और वहीं पर उसने एक छोटा सा गांव भी बसा दिया। लेकिन कुछ दिनों के बाद ही उसकी असलियत लोगों के बीच आने लगी। वो अपने अनुयायियों (चाहे वो महिला हो या पुरुष) से दिनभर काम कराता था और रात में जब वो थक-हारकर सोने के लिए जाते, तो वो उन्हें सोने भी नहीं देता था और अपना भाषण शुरू कर देता था। इस दौरान उसके सिपाही घर-घर जाकर देखते थे कि कहीं कोई सो तो नहीं रहा। यदि कोई सोता हुआ मिलता था तो उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाती थी।

जिम जोंस अपने अनुयायियों को गांव से बाहर भी नहीं जाने देता था। पुरुष और महिलाएं जब काम करती थीं, तो उनके बच्चों को एक कम्युनिटी हॉल में रखा जाता था। उसके सिपाही गांव के चारों ओर दिन-रात पहरा देते रहते थे, ताकि कोई वहां से भाग न जाए। जिम जोंस का अंधविश्वास का जाल इतना फैल चुका था कि वो अपने अनुयायियों से कुछ भी कहता, तो लोग उसे मान लेते थे। इसी बीच अमेरिकी सरकार को वहां हो रही गतिविधियों के बारे में पता चला। सरकार ने जिम जोंस पर कार्रवाई करने की सोची। लेकिन इसका पता जिम जोंस को भी चल गया और उसने अपने सभी अनुयायियों को एक जगह इकट्ठा होने को कहा।

जिम जोंस ने इक्ट्ठा हुए सभी लोगों से कहा कि ‘अमेरिकी सरकार हम सबको मारने आ रही है। इससे पहले कि वो हमें गोलियों से छलनी करें, हम सबको पवित्र जल पी लेना चाहिए। ऐसा करने से हम गोलियों के दर्द से बच जाएंगे।’ अगर हम लोग इस पवित्र जल को नहीं पीते हैं तो वो हमें बम से उड़ा देंगे और जो बच जाएंगे उनके साथ जानवरों जैसा सलूक करेंगे। महिलाओं के साथ रेप करेंगे, बच्चों को तरह-तरह की तकलीफें देंगे। इसलिए हमें खुद को उनसे बचाने के लिए पवित्र जल पीना पड़ेगा।

जोंस ने पहले से ही एक बड़े से टब में खतरनाक जहर मिलाकर एक सॉफ्ट ड्रिंक बनवा लिया था और लोगों को पीने के लिए दे दिया। जो लोग इस सामूहिक आत्महत्या में शामिल नहीं होना चाहते थे, उन्हें गन प्वाइंट पर ऐसा करना पड़ा। इस तरह एक अंधविश्वासी के चक्कर में पड़ 900 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इनमें 300 से अधिक बच्चे भी शामिल थे। इस घटना को अब तक के सबसे बड़े नरसंहारों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि लोगों के मरने के बाद जिम जोंस का शव भी एक जगह पाया गया था।

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