कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ सेल्फी लेने के लिए खड़ा रहता था ये शख्स, अब उसी से सिंधिया को मिली करारी हार

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टीम चैतन्य भारत

लोकसभा चुनाव 2019 में देश की 542 सीटों में से ज्यादातर के नतीजे आ चुके हैं। इस बार फिर देशभर में मोदी लहर देखने को मिली। बीजेपी ने रिकॉर्ड तोड़ जीत हासिल कर अपना पर्चम लहराया। इस चुनाव में कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की हार हुई। इन्ही नेताओं में से एक हैं ग्वालियर राजघराने के ज्योतिरादित्य सिंधिया। सिंधिया को मध्य प्रदेश की गुना सीट से बीजेपी के डॉ. कृष्ण पाल यादव ने एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया। कृष्ण पाल वहीं हैं जो इस तस्वीर में सिंधिया के संग सेल्फी लेते हुए नजर आ रहे हैं।

बता दें यादव कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया की जीत के राजदार हुए करते थे। लेकिन पिछले उपचुनाव में अपनी अनदेखी के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का हाथ थाम लिया था। 45 वर्षीय कृष्ण पाल यादव पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर हैं। उनके पिता अशोकनगर में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। यादव और सिंधिया कभी एक-दूसरे के नजदीकी हुआ करते थे। सिंधिया की चुनाव की तैयारियों को वह अच्छी तरह देखते थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंगावली विधानसभा के उपचुनाव में यादव ही मुख्य दावेदार थे। खुद सिंधिया ने उनसे चुनाव लड़ने की तैयारी करने को कहा था। फिर यादव इस क्षेत्र में सक्रिय भी हो गए थे। लेकिन ऐन वक्त पर पार्टी ने उनका टिकट काट दिया। इससे नाराज यादव कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए। सूत्रों के मुताबिक, जब सिंधिया के सामने बीजेपी ने केपी यादव को उतारा था तो ये कहा गया था कि, 23 मई को सिंधिया आसानी से जीत हासिल कर लेंगे, क्योंकि यादव कमजोर प्रत्याशी हैं। लेकिन अंत में यादव ने सिंधिया के पसीने छुड़ा दिए।

यादव और सिंधिया का एक किस्सा भी काफी चर्चा में रहा था। दरअसल, ज्योतिरादित्य की पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पोस्ट कर तंज कसते हुए कहा था कि, ‘जो कभी महाराज के साथ सेल्फी लेने की लाइन में रहते थे, उन्हें भाजपा ने अपना प्रत्याशी चुना है।’ लेकिन प्रियदर्शिनी को जरा भी अंदाजा नहीं था कि ये मजाक उन्हें कितना भारी पड़ जाएगा। गौरतलब है कि, गुना सीट को सिंधिया परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। इस सीट पर पिछली तीन पीढ़ियों से सिंधिया घराने का कब्जा रहा है। सबसे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयराजे सिंधिया और फिर उनके पिता माधवराव सिंधिया ने गुना सीट जीतकर इतिहास रचा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक गुना सीट से विजयराजे सिंधिया 6 बार, माधवराव सिंधिया 4 बार और ज्योतिरादित्य ने भी 4 बार प्रतिनिधित्व किया है।

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