कल्याण सिंह मामले में उठ रहे सवाल, तिरंगे के ऊपर रखा बीजेपी का झंडा, जानें क्या है नियम?

चैतन्य भारत न्यूज

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का शनिवार रात को निधन हो गया। उन्होंने 89 की उम्र में अंतिम सास ली। वह काफी वक्त से बीमार चल रहे थे। रविवार को लखनऊ स्थित उनके आवास पर उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। उनके शव को तिरंगे को लपेटा गया था, लेकिन बाद में उनके पैर की ओर बीजेपी का झंडा भी रख दिया गया। इसके बाद विपक्षी दलों ने बीजेपी पर हमला शुरू कर दिया।

तिरंगे के ऊपर बीजेपी का झंडा रखने पर विपक्ष ने इसे ‘तिरंगे का अपमान’ बताया। तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने ट्वीट किया, ‘राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करना क्या मातृभूमि का सम्मान करने का नया तरीका है?’ वहीं, यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास ने तस्वीर साझा करते हुए पूछा है कि ‘क्या भारत के झंडे से ऊपर किसी पार्टी का झंडा रखना ठीक है?’

कल्याण सिंह के पार्थिव शरीर पर क्यों रखा गया बीजेपी का झंडा? शव पर तिरंगे के इस्तेमाल को लेकर क्या है नियम? आइए समझते हैं…

कल्याण सिंह के पार्थिव शरीर पर क्यों रखा गया बीजेपी का झंडा?

ये कल्याण सिंह की इच्छा थी। उन्होंने एक बार कहा था, ‘संघ और भारतीय जनता पार्टी के संस्कार मेरे रक्त के बूंद-बूंद में समाए हुए हैं। मेरी इच्छा है कि जीवन भर भाजपा में रहूं और जीवन का जब अंत होने का हो तो मेरा शव भी भारतीय जनता पार्टी के झंडे में लिपटकर जाए।’ इसलिए बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनके पार्थिव शरीर पर बीजेपी का झंडा रखा।

किनके शव को लपेटा जाता है तिरंगे में?

भारतीय झंडा संहिता 2002 के अनुसार, तिरंगे का इस्तेमाल आम लोगों के अंतिम संस्कार के लिए नहीं किया जा सकता। तिरंगे का इस्तेमाल सिर्फ उन लोगों के अंतिम संस्कार के लिए ही किया जा सकता है, जिन्हें राष्ट्रीय सम्मान दिया जा रहा हो। जैसे- एक शहीद के अंतिम संस्कार में या फिर किसी राजनेता के अंतिम संस्कार में।

झंडे को दफनाया या जलाया नहीं जाएगा?

जब किसी व्यक्ति के शव को तिरंगे से लपेटा जाता है, तो उस दौरान तिरंगे का केसरिया भाग आगे की ओर रहेगा। इसके अलावा झंडे को कब्र में दफनाया या चिता में जलाया नहीं जा सकता। दफनाने या मुखाग्नि से पहले तिरंगे को हटा लिया जाता है और मृतक के परिजनों को दे दिया जाता है। इस झंडे को समेटने का भी खास तरीका होता है, जिसमें झंडे का अशोक चक्र सबसे ऊपर होता है।

कहां इस्तेमाल नहीं हो सकता तिरंगा?

  • झंडे का इस्तेमाल किसी पोशाक या वर्दी में नहीं हो सकता। न ही तकियों, रुमालों या नेपकिन पर छापा जा सकता है।
  • झंडे पर कुछ लिखा नहीं जा सकता। न ही किसी सामान को लेने-देने या ले जाने के लिए किया जा सकता है।
  • झंडे का इस्तेमाल किसी स्मारक या प्रतिमा को ढंकने के लिए नहीं किया जा सकता। तिरंगे को किसी गाड़ी, रेलगाड़ी, नाव या प्लेन को अगल-बगल या पीछे से ढंकने में नहीं किया जा सकता।

नियमों के उल्लंघन पर सजा भी मिलती है?

भातयीय झंडा संहिता 2002 के मुताबिक, अगर कोई भी व्यक्ति तिरंगे का अपमान करता है, उसे जलाता है, गंदा करता है या किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाता है तो उसे तीन साल कैद, जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है।

तिरंगे के ऊपर क्या हो, क्या नहीं, इसका कोई जिक्र नहीं

संविधान और कानून के जानकार वकील विष्णु शंकर जैन बताते हैं कि ध्वज संहिता के पांचवें प्रावधान में सम्मानित हस्ती और शहीद सैनिकों के पार्थिव शरीर पर राष्ट्र ध्वज लपेटने की बात कही गई है। लेकिन उस समय तिरंगे के ऊपर क्या हो या न हो इसका कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने बताया कि राष्ट्र ध्वज संहिता के नियम 2.2 के आठवें प्रावधान में ये जरूर कहा गया है कि ध्वज फहराते हुए ध्वजदंड पर तिरंगे के ऊपर या बराबर कोई और ध्वजा, पताका या फूल माला नहीं होनी चाहिए।

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