कमलनाथ सरकार ने विवाद के बाद वापस लिया कर्मचारियों को नसबंदी का टारगेट देने का आदेश

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चैतन्य भारत न्यूज

भोपाल. मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने कर्मचारियों को नसबंदी का टारगेट देने वाला अपना विवादित आदेश वापस ले लिया है। इसकी जानकारी मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने दी। उन्होंने कहा कि, ‘राज्य सरकार ने इस आदेश को वापस ले लिया है।’


ये है आदेश

दरअसल, जनसंख्या नियंत्रण के लिए कमलनाथ सरकार ने एक अजीबो-गरीब फरमान जारी किया था। सरकार ने उन सभी पुरुष स्वास्थय कर्मचारियों की सूची तैयार करने का आदेश दिया था जो साल 2019-20 में एक भी पुरुष की नसबंदी नहीं करा पाए। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (NFHS-4) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बताया था कि, ‘राज्य में साल 2019-20 में सिर्फ 0.5 प्रतिशत पुरुषों ने ही नसबंदी करवाई है। ये लक्ष्य से बेहद कम है।

5-10 पुरुषों की नसबंदी करवाने का लक्ष्य

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को पुरूष नसबंदी के लक्ष्य पूरा ना करने पर वेतन में कटौती और अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का आदेश दिया गया था। साथ ही इस आदेश में टारगेट पूरा ना करने पर ‘नो पे, नो वर्क’ फॉर्मूले के तहत कार्रवाई का आदेश दिया था। बता दें नियोजन कार्यक्रम में कर्मचारियों को पांच से दस पुरूषों की नसबंदी कराना अनिवार्य किया गया है।

शिवराज सिंह चौहान ने की आलोचना

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस आदेश को लेकर कहा था कि, ‘मध्यप्रदेश में अघोषित आपातकाल है। क्या ये कांग्रेस का इमरजेंसी पार्ट-2 है? एमपीएचडब्ल्यू (Male Multi Purpose Health Workers) के प्रयास में कमी हो, तो सरकार कार्रवाई करे, लेकिन लक्ष्य पूरे नहीं होने पर वेतन रोकना और सेवानिवृत्त करने का निर्णय, तानाशाही है।’

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