कमलनाथ के बाद शिवराज के करीबी फंस सकते हैं मुसीबत में, 3 हजार करोड़ के ई-टेंडर घोटाले में एफआईआर दर्ज

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चैतन्य भारत न्यूज 

भोपाल. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में हुए 3 हजार करोड़ के ई-टेंडर घोटाले में अब कमलनाथ सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 कंपनियों सहित इनके संचालकों और अज्ञात नेताओं, अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। बुधवार को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने यह एफआईआर दर्ज की है। सूत्रों के मुताबिक, जिन भी लोगों पर एफआईआर हुई है, उनमें से जल निगम, पीडब्ल्यूडी, मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम, जल संसाधन विभाग के अफसरों सहित 8 कंपनियों के निदेशक भी शामिल हैं।

इन सभी पर आईपीसी की धारा 420, 468, 471, 120 बी, आईटी एक्ट की धारा-66 के अलावा और भी कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस बारे में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक केएल तिवारी ने बताया कि, ‘साल 2018 में जनवरी से मार्च के बीच ये सभी टेंडर निकाले गए थे। इन सभी में करीब 3000 करोड़ रुपए की राशि जुड़ी थी। एफआईआर के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की जाएगी।’ रविवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड, सलाहकार आरके मिगलानी और कक्कड़ के करीबी अश्विन शर्मा के ठिकानों पर आयकर टीम की दिल्ली विंग की टीम ने छापे मारे थे। इसके बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि पलटवार करने के लिए राज्य सरकार ई-टेंडरिंग घोटाला, विज्ञापन घोटाला और अन्य मामलों में कार्रवाई कर सकती है।

कंपनियों को दिए 3000 करोड़ रु. के टेंडर

पिछले लंबे समय से ई-टेंडर घोटाले की जांच अटकी हुई थी। इसमें जल निगम के तीन हजार करोड़ रुपए के तीन टेंडर में पसंदीदा कंपनी को काम देने के लिए टेंपरिंग करने का आरोप था। कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम को एनालिसिस रिपोर्ट पेश करने के लिए ईओडब्ल्यू ने 13 हार्ड डिस्क भी भेजी थी। जिसके बाद इनमे से तीन में टेंपरिंग की पुष्टि हो चुकी है। इसकी जांच तीन हजार करोड़ से बढ़कर 80 हजार करोड़ के टेंडर तक चली गई है।

9 ई-टेंडर साफ्टवेयर के साथ की गई छेड़छाड़

ईओडब्ल्यू के महानिदेशक केएल तिवारी ने कहा कि, ‘3 हजार करोड़ के ई टेंडरिंग घोटाले की जांच में यह पाया गया कि ई प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ कर मप्र जल निगम मर्यादित के 3 टेंडर, लोक निर्माण विभाग के 2, जल संसाधन विभाग के 2, मप्र सड़क विकास निगम का एक, लोक निर्माण विभाग की पीआईयू का एक। कुल 9 निविदाओं के साफ्टवेयर में छेड़छाड़ की गई।’ साल 2018 के विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस ने ई-टेंडरिंग घोटले को प्रमुख मुद्दा बनाया था। साथ ही कांग्रेस ने ये भी दावा किया था कि, यह व्यापम घोटाले से बहुत बड़ा हो सकता है।

इन आठ कंपनियों के संचालकों पर एफआईआर

  • हैदराबाद की कंस्ट्रक्शन कंपनियां- जीवीपीआर लिमिटेड और मैक्स मेंटेना लिमिटेड
  • मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनियां- ह्यूम पाइप लिमिटेड और जेएमसी लिमिटेड
  • बड़ौदा की कंस्ट्रक्शन कंपनियां- सोरठिया बेलजी प्राइवेट लिमिटेड और माधव इन्फ्रो प्रोजेक्ट लिमिटेड
  • भोपाल की कंस्ट्रक्शन कंपनी राजकुमार नरवानी लिमिटेड के संचालक और यहां की ही साफ्टवेयर कंपनी ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के संचालक भी इसमें शामिल हैं।
  • इनमे एमपीएसईडीसी, मप्र के संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारियों के साथ ही एंट्रेस प्राइवेट लिमिटेड बेंगलुरु और टीसीएस के अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल हैं।

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