‘भारतीय उसेन बोल्ट’ रेसर श्रीनिवास ने ट्रायल्स देने से किया इनकार, खेल मंत्री ने भेजा था प्रस्ताव

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चैतन्य भारत न्यूज

बेंगलुरु. पारंपरिक कंबाला रेस होने के बाद से ही कर्नाटक के श्रीनिवास गौड़ा की तुलना दुनिया के सबसे तेज धावक जमैका के उसेन बोल्ट से की जा रही है। श्रीनिवास ने 100 मीटर की रेस महज 9.55 सेकेंड में पूरी कर ली थी। खेल मंत्री किरण रिजीजू इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने श्रीनिवास को ट्रायल्स के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में बुलाने की बात कही थी। लेकिन अब श्रीनिवास ने ट्रायल्स में भाग लेने से इनकार कर दिया है।



श्रीनिवास ने कहा कि, ‘उन्हें अपना खेल ही पसंद है और वे उसी को खेलेंगे।’ श्रीनिवास ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि, ‘दोनों ही खेल अलग हैं। ट्रैक दौड़ में हम जहां अंगूठे के बल पर दौड़ते हैं वहीं कंबाला में हमें एड़ियों का इस्तेमाल करना होता है। कंबाला में भैंसे की भी अहम भूमिका होती है। मैं भारतीय खेल प्राधिकरण के ट्रायल में हिस्सा लेने के लिए फिट नहीं हूं। मेरे पांव में चोट लग गई थी और मेरा ध्यान भी कंबाला पर है।’

30 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा

28 वर्षीय श्रीनिवास गौड़ा दक्षिण कन्नड़ जिले के मूदाबिदरी के रहने वाले हैं। श्रीनिवास ने पारंपरिक कंबाला रेस (भैंसों की रेस) में 13.62 सेकंड में 142.50 मीटर की रेस पूरी की है। उन्होंने इतनी तेज दौड़कर भैसों की रेस में 30 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। नया रिकॉर्ड अपने नाम करने के बाद लोग उनकी स्पीड का आंकलन कर रहे हैं। समय के हिसाब से 100 मीटर की रेस में श्रीनिवास की स्पीड 9.55 सेकंड रही, जो बोल्ट से 0.03 सेकंड तेज है। बोल्ट के नाम 100 मीटर रेस में 9.58 सेकेंड का वर्ल्ड रिकॉर्ड है।

श्रीनिवास का कमाल उल्लेखनीय

हालांकि श्रीनिवास गौड़ा की तुलना सीधे तौर पर बोल्ट से इसलिए नहीं की जा सकती है, क्योंकि श्रीनिवास भैंसों के जोड़े के साथ कीचड़ में दौड़ रहे थे। ऐसी स्थिति में रफ्तार अलग हो जाती है। लेकिन श्रीनिवास का यह कमाल भी अपने आप में उल्लेखनीय है।

क्या है कंबाला रेस?

कंबाला रेस कर्नाटक का एक पारंपरिक खेल है। यह मंगलौर और उडूपी में ज्यादा प्रचलित है। इस खेल का आयोजन कीचड़ में किया जाता है। मंगलौर और उडूपी के कई गांवों में कंबाला का आयोजन होता है, जिसमें दर्जनों उत्साही युवा अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षित भैंसों के साथ भाग लेते हैं। इस दौरान कीचड़ वाले इलाके में युवा दो भैंसों के साथ दौड़ लगाते हैं।

कंबाला पर प्रतिबंध की मांग

कुछ साल पहले जानवरों का संरक्षण करने वाले कार्यकर्ताओं ने कंबाला का विरोध किया था और इस खेल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि जॉकी बल प्रयोग कर तेज दौड़ने के लिए भैंसों को मजबूर करता है। इसके बाद कुछ साल के लिए इस पारंपरिक खेल पर लोक लगा दी गई थी। हालांकि, तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने खेल को जारी रखने के लिए एक विशेष कानून पारित कराया था।

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