मरने के बाद फिर से जी उठा था कारगिल युद्ध का यह हीरो, कृत्रिम पैर के सहारे बनाए वर्ल्ड रिकॉर्ड

major dp singh,kargil war

चैतन्य भारत न्यूज

इस वर्ष कारगिल विजय दिवस की 20वीं सालगिरह है। ऐसे में हम आपको कई ऐसे वीर योद्धाओं की गाथा बताएंगे जो भारत को यह युद्ध जीताने में अपनी जान पर खेल गए। इन्हीं में से एक योद्धा ऐसा भी है जो मरने के बाद जी उठा। हम बात कर रहे हैं मेजर डीपी सिंह के बारे में जो अब एक मिसाल बन चुके हैं।

मेजर डीपी सिंह को फर्स्ट इंडियन ब्लेड मैराथन रनर के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने मौत को भी मात दे दी और इसलिए आज वह लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। मेजर डीपी सिंह के पुनर्जन्म की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है। वह हर वर्ष 15 जुलाई को अपना पुनर्जन्म दिवस मनाते हैं। उनकी उम्र 45 वर्ष है लेकिन मेजर के हिसाब से अभी उन्होंने जीवन के 19 वर्ष ही पूरे किए हैं। जानकारी के मुताबिक, डीपी सिंह कारगिल युद्ध में बुरी तरह जख्मी हो गए थे। उनका एक पैर भी कट चुका है। इलाज के दौरान डीपी सिंह को मृत घोषित कर दिया था। लेकिन वह दोबारा जी उठे।

डीपी सिंह ने बताया कि, यह बात 1999 की है जब कारगिल युद्ध चल रहा था। इस दौरान एक ब्लास्ट हुआ था। इस ब्लास्ट की वजह से आठ किलोमीटर दूर तक उनके साथी मारे गए थे। सभी के शव उनकी आंखों के सामने थे। वह ब्लास्ट से डेढ़ किलोमीटर दूर खून से लथपथ थे और अपना एक पैर गवां चुके थे। शरीर पर करीब 40 गहरे घाव थे।

डीपी सिंह ने आगे बताया कि उनके साथी अपनी जान दांव पर लगाकर मेजर को सुरक्षित स्थान पर ले गए। बीच में पाक ऑक्यूपाइड नदी आई। उनके एक साथी को तो ठीक से तैरना भी नहीं आता था लेकिन फिर भी उन्होंने मेजर को अस्पताल तक पहुंचाया। साथियों को किसी भी क्षण गोली लग सकती थी, लेकिन किसी ने भी अपनी जान की परवाह किए बगैर मेजर को अकेला नहीं छोड़ा। अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर ने डीपी सिंह को मृत घोषित कर दिया था।

डीपी सिंह ने आगे कहा कि, ‘मेरी किस्मत में उस वक्त और जीना लिखा था। उसी दिन एक सीनियर डॉक्टर हॉस्पिटल के दौरे पर थे और उनकी कोशिशों से मेरे शरीर में जिंदगी लौटी। बस उसी समय से मेरी नई जिंदगी शुरू हुई। तब से हर 15 जुलाई को मैं अपना मृत्यु व जन्म दिवस मनाता हूं।’ डीपी सिंह ने धीरे-धीरे खुद को सभी जख्मों से उभारा और 2009 में कृत्रिम पैर के सहारे चलना सीखा। खास बात तो यह है कि मेजर ने कृत्रिम पैर के सहारे ही मैराथन भी दौड़ी है। उन्होंने 21 किमी की आधी मैराथन दौड़कर अपने नाम रिकॉर्ड दर्ज कराया। उनसे पहले भारत में ऐसा किसी ने भी नहीं किया था। अब तक डीपी सिंह तीन मैराथन में हिस्सा ले चुके हैं।

डीपी सिंह ने बताया कि, उनका नाम दो बार लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हो चुका है। मेजर ने बताया कि, उन्हें सेना ने कृत्रिम पैर दिलाए हैं। इन्हें ‘ब्लेड प्रोस्थेसिस’ कहा जाता है। इस कृत्रिम पैर का निर्माण भारत में नहीं बल्कि पश्चिमी देशों में होता है। बता दें मेजर डीपी सिंह ‘दि चैलेंजिंग वंस’ नाम की एक संस्था भी चलाते हैं। इसका निर्माण उन्होंने साल 2011 में अपने जैसे ही और भी कुछ लोगों के साथ मिलकर किया था। इस ग्रुप से फिलहाल 800 लोग जुड़े हुए हैं। इनमे से 90 सदस्य दौड़, स्वीमिंग, राइडिंग व पैरा ओलंपिक आदि में हिस्सा ले रहे हैं।

Related posts