कारगिल विजय दिवस: कारगिल युद्ध के शेरशाह के नाम से मशहूर हैं शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा, लाखों की नौकरी छोड़ सेना को चुना था

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चैतन्य भारत न्यूज

हर वर्ष 26 जुलाई का दिन कारगिल विजय दिवस के रूप मनाया जाता है। साल 2020 में कारगिल विजय दिवस की 21वीं सालगिरह है। भारत और पाकिस्तान के बीच 60 दिनों तक चलने वाले कारगिल युद्ध में कई जवान शहीद हो गए थे। इन्हीं में से एक वीर योद्धा हैं कैप्टन विक्रम बत्रा। 9 सितंबर, 1974 को जन्मे विक्रम की बहादुरी के कारण उन्हें भारतीय सेना ने शेरशाह तो पाकिस्तानी सेना ने शेरखान नाम दिया था।

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कैप्टन विक्रम बत्रा युद्ध के नायक के तौर पर लड़े। कैप्टन बत्रा ने लाख रुपए की सैलरी वाली नौकरी को ठोकर मार कर भारतीय सेना को चुना। कैप्टन बत्रा ने 10 पाक सैनिकों को मारकर प्वाइंट 5140 चोटी पर तिरंगा फहराया। यह कारगिल का बेहद ही खतरनाक पॉइंट माना जाता है। 7 जुलाई 1999 को कैप्टन विक्रम बत्रा को मास्को घाटी की प्वाइंट 4875 की चोटी को दुश्मन से आजाद करवाने का टास्क मिला। बहादुरी से लड़ते हुए कैप्टन बत्रा ने चोटी दुश्मन से आजाद करवा ली।

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मिशन पूरा हो चुका था और इसी बीच कैप्टन विक्रम की नजर अपने जूनियर साथी लेफ्टिनेंट नवीन पर पड़ी, जिसका पांव दुश्मन द्वारा फेंके ग्रेनेड से बुरी तरह जख्मी हो गया था। कैप्टन बत्रा अपने साथी को कंधे पर उठा सुरक्षित जगह पर लेकर जा रहे थे। विक्रम ने लेफ्टिनेंट नवीन से कहा था कि, ‘तुम हट जाओ। तुम्हारे बीवी-बच्चे हैं।’ तभी पाक सैनिकों ने विक्रम पर हमला बोल दिया और एक गोली उनके सीने को भेदते हुए निकल गई। वह 25 साल के थे जब उन्होंने देश की खातिर अपनी जान न्योछावार कर दी। मरणोपरांत विक्रम को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

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