कर्नाटक राजनीतिक संकट : सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्पीकर को आदेश- मंगलवार तक विधायकों के इस्तीफे पर कोई फैसला न लें

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. कर्नाटक में जारी राजनीतिक संकट खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों और विधानसभा स्पीकर की याचिका पर सुनवाई हुई। जानकारी के मुताबिक, आज से ही विधानसभा का भी सत्र शुरू होने जा रहा है। इस बीच देखना तो यह दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी अपनी सरकार को किस तरह बचा पाते हैं।

कोर्ट में सुनवाई शुरू होने के बाद विधायकों के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि, ‘स्पीकर इस्तीफे मंजूर न करके उन्हें अयोग्य घोषित करना चाह रहे हैं। इस्तीफे पर फैसला लेने का विधानसभा में स्पीकर के अधिकार क्षेत्र से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि, ‘स्पीकर का मकसद इस्तीफे को लंबित रखकर विधायकों को अयोग्य करार देने का है ताकि ऐसे में इस्तीफे निष्प्रभावी हो जाए। यदि स्पीकर इस्तीफे पर फैसला नहीं लेते तो ये सीधे-सीधे अदालत की अवमानना है।’

इसके बाद जब स्पीकर के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी दलील देनी शुरू की तो चीफ जस्टिस उनसे पूछा कि- क्या सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को चुनौती दे रहे हैं स्पीकर? चीफ जस्टिस के इस सवाल पर वकील सिंघवी ने कहा कि, ‘विधायकों के इस्तीफे देने का मकसद अयोग्य करार दिए जाने की कार्रवाई से बचना है।’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘1974 में संविधान संशोधन के जरिए ये साफ कर दिया था कि इस्तीफे पर फैसला लेने से पहले ये सुनिश्चित करना जरूरी है कि वो सही है भी या नहीं।

सुनवाई के दौरान तीसरे नंबर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री की ओर से वकील राजीव धवन ने दलील देते हुए कहा कि, आखिर किस आधार पर संविधान के आर्टिकल-32 का हवाला देकर ये याचिका दायर की गई है? उन्होंने आगे सवाल किया कि, कैसे सुप्रीम कोर्ट के दखल का औचित्य बनता है? जो वजह विधायकों की ओर से बताई गई है, वो तो इस दायरे में नहीं आती। ये स्पीकर का दायित्व है कि वो यह सुनिश्चित करें कि इस्तीफे सही हैं या नहीं।’

इस सियासी संकट के बीच शुक्रवार को एक नया मोड़ आया है। आज करीब 400 कांग्रेसी कार्यकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और उन्होंने कर्नाटक के बागी विधायकों के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जल्द से जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कोर्ट से कहा कि, ‘हमें भी सुना जाए।’ इसका जवाब देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, ‘पहले बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई होगी, तब आपको भी सुन लेंगे।’

एक लंबी बहस के बाद अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार को यह आदेश दिया है कि, वो अगले मंगलवार यानी 16 जुलाई तक इस मामले में कोई फैसला न लें। इस दौरान स्पीकर न तो विधायकों के इस्तीफे पर और न ही उन्हें अयोग्य करार देने पर कोई फैसला ले सकते हैं।

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