तीन दशक की जद्दोजहद के बाद कश्मीरी केसर को मिली असली पहचान, मिला GI टैग

kashmiri kesar

चैतन्य भारत न्यूज

करीब 30 साल की जद्दोजहद के बाद आखिरकार कश्मीरी केसर को अपनी खास पहचान मिल गई है। कश्मीरी केसर को अब जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्रेशन (GI Tag) मिल गया है। अब से कश्मीरी केसर के नाम से बाजार में ईरान और स्पेन का केसर नहीं बिकेगा।

बार कोडिंग के बाद बेचा जा सकेगा कश्मीरी केसर

चेन्नई स्थित ज्योग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्रार कार्यालय से कश्मीर कृषि निदेशालय, स्कॉस्ट कश्मीर और केसर अनुसंधान केंद्र डुस्सू पांपोर को पंजीकृत कर लिया गया है। रजिस्ट्री ने बाकायदा सर्टिफिकेट जारी कर कश्मीरी केसर को जीआइ टैग नंबर 635 भी प्रदान किया है। यानी अब कश्मीरी केसर को बार कोडिंग के बाद ही बेचा जा सकेगा। इससे एक तरफ जम्मू-कश्मीर के केसर उत्पादकों को बड़े स्तर पर लाभ होगा, वहीं दुनिया भर में कश्मीरी केसर के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी पर भी अंकुश लगेगा।

किसी भी देश को नहीं मिला जीआई टैग

वैसे तो स्वीडन, स्पेन, ईरान, इटली, फ्रांस और ग्रीस में केसर की अच्छी खेती होती है लेकिन कश्मीरी केसर अपने गुणों के कारण ज्यादा मशहूर है। भारत के अलावा किसी भी देश को केसर का जीआई टैग नहीं मिल पाया है। इसके पीछे कश्मीरी केसर की गुणवत्ता को ही मुख्य वजह बताया जा रहा है।

दो हजार साल पुराना कश्मीर केसर का इतिहास

कश्मीर में केसर का इतिहास करीब दो हजार से भी ज्यादा साल पुराना है। जानकारी के मुताबिक, चीन के महान चिकित्सक वॉन जेन ने 500 ईसा पहले कश्मीर को केसर का घर बताया था। बता दें दक्षिण कश्मीर के पुलवामा, पांपोर और सेंट्रल कश्मीर के बडग़ाम व श्रीनगर में भी केसर की पैदावार होती है। दुनियाभर में करीब 300 टन केसर पैदा होती है, जबकि भारत के जम्मू-कश्मीर में 17 टन केसर पैदा होती है। दुनिया का 90 प्रतिशत केसर ईरान पैदा करता है।

इसलिए सर्वश्रेष्ठ है कश्मीरी केसर

ऑल जे एंड के सैफरॉन ग्रोअर्ज डेवलपमेंट मार्केटिंग एसोसिएशन से जुड़े अब्दुल मजीद वानी ने बताया कि कश्मीरी केसर अपनी ग्रेङ्क्षडग और गुणवत्ता के आधार पर बाजार में 200 से लेकर 500 रुपए प्रति ग्राम आसानी से बिकता है। क्रोसिन की उच्च सांद्रता के कारण कश्मीरी केसर गुणवत्ता में सर्वश्रेष्ठ है। कोसिन एक कैरोटीनॉयड वर्णक है, जो केसर को उसके रंग और औषधीय गुण देता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, जो तत्व ईरानी केसर में 682 प्रतिशत हैं वहीं कश्मीरी केसर में 872 प्रतिशत पाए जाते हैं। इसी वजह से कश्मीर केसर गहरा रंग, बेहतर जायका और औषधीय गुण प्रदान करता है।

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