जीवनसाथी को खुश रखेंगे तो मिलेगी लंबी उम्रः शोध

चैतन्य भारत न्यूज

लंबी उम्र के लिए कोई तय फॉर्मूला नहीं है इसलिए हर व्यक्ति का इस बारे में अपना दृष्टिकोण है। इतना जरूर है कि प्रसन्न या खुश रहने से उम्र लंबी होती है। ताजा शोध में पता चला है कि लंबी उम्र के लिए खुद खुश रहने के साथ-साथ अपने जीवनसाथी को भी खुश रखना जरूरी है।

नीदरलैंड की टिलबर्ग यूनिवर्सिटी में हुए इस शोध को ‘साइकोलॉजिकल साइंस जर्नल’ में प्रकाशित किया गया है। रिसर्च करने वाली ओल्गा स्तावरोवा ने बताया कि यह अध्ययन व्यक्ति के स्वास्थ्य पर उसके आस-पास के सामाजिक माहौल के असर को बताता है। जिन लोगों के जीवनसाथी सक्रिय जीवन जीते हैं, उनकी स्वयं की जीवनशैली भी सक्रिय रहने की संभावना होती है। ओल्गा के मुताबिक यदि आपका जीवनसाथी डिप्रेशन में है और शाम को टीवी के सामने बैठकर चिप्स खाना पसंद करता है तो आपकी हर शाम भी अमूमन ऐसे ही गुजरेगी। ओल्गा ने यह अध्ययन 4400 दंपतियों पर किया। इन दंपतियों की उम्र 50 साल से अधिक थी। आंकड़े इकट्ठा करने के शुरुआत के आठ साल बाद ही करीब 16 फीसदी प्रतिभागियों का निधन हो गया। जिन लोगों का निधन हुआ, वे जीवित प्रतिभागियों की तुलना में बुजुर्ग, कम शिक्षित, कम अमीर, शारीरिक रूप से कम सक्रिय और खराब स्वास्थ्य वाले थे। वे जीवित प्रतिभागियों के मुकाबले रिलेशनशिप और जीवन में भी कम संतुष्ट थे और उनके जीवनसाथी भी जीवन से कम संतुष्ट थे। अध्ययन में पता चला कि जिन लोगों के जीवनसाथी अध्ययन की शुरुआत में जीवन में संतुष्ट थे, उनके मरने का खतरा अपेक्षाकृत कम था।

अध्ययन में शामिल किए गए लोगों से कई प्रश्न उनके जीवनसाथी चुने जाने के बारे में भी किए गए थे। अधिकांश सवाल उनके सामान्य जीवन और सामाजिक- आर्थिक व्यवस्था से जुड़े थे। इसमें दंपति यानी पति-पत्नी से एक जैसे ही सवाल किए गए थे। इनमें से अधिकांश के जवाब भी एक जैसे ही सामने आए थे।

जवाब देने में तत्परता बरतने वाले ज्यादा जीवित रहे

अध्ययन में शामिल लोगों के सामाजिक व्यवहार और घरेलू, निजी जीवन से जुड़े कई प्रश्न पूछे गए। इन प्रश्नों का उद्देश्य सिर्फ यही जानना था कि वे कितना खुश रहते हैं। जीवन से संतुष्ट लोगों ने जवाब देने में तत्परता बरती जबकि जिन लोगों की मौत हो गई थी उन्होंने जवाब देने में कई बार आनाकानी भी की थी। इनमें से कई लोग तो ऐसे थे जिन्होंने जवाब ही नहीं दिया था।

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