किसी की निजता, किसी की पहचान, किसी की व्यक्तिगत अभिव्यक्ति है उसका नाम : केरल हाईकोर्ट

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चैतन्य भारत न्यूज

कोच्चि. केरल हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत किसी व्यक्ति के नाम को वैसे ही बोलना, जैसी उसका इच्छा है, उस व्यक्ति का मौलिक अधिकार है।

एक युवती ने नाम में बदलाव के लिए सीबीएसई को निर्देशित करने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने कहा कि, नाम किसी की निजता, किसी की पहचान और किसी की विशिष्टता की अभिव्यक्ति है। नाम वह तरीका है जिससे व्यक्ति दुनिया में खुद को अभिव्यक्त करता है। यह वह आधार है जिस पर वह सभ्य समाज में रहता है।’

हाईकोर्ट ने कहा, ‘नाम रखना और उसे वैसे बोलना, जैसी उस व्यक्ति की इच्छा है, जिसका नाम लिया जा रहा है, निश्चित रूप से अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है।’ कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि, लोकतंत्र में कोई अपनी पसंद से जिस नाम से अपने को मुक्त रूप से अभिव्यक्त करना चाहे वह उसकी निजता के अधिकार का एक पहलू है।

बता दें 17 वर्षीय छात्रा कशिश गुप्ता ने वकील केआर विनोद के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की है। इसमें सीबीएसई को जारी किए गए प्रमाणपत्र पर नाम बदलने के लिए निर्देशित करनी की मांग की गई है। मामले में केरल सरकार ने याचिकाकर्ता की नाम बदलने की इच्छा को स्वीकार कर लिया था। इस संबंध में 2017 में राजपत्र अधिसूचना भी जारी की गई, जिसके बाद जन्म प्रमाण पत्र सरकार द्वारा जारी अन्य दस्तावेज में याचिकाकर्ता का में नाम बदल दिया गया।

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