खजराना गणेश मंदिर में मन्नत पूरी करने के लिए शास्त्रों के विपरीत काम करते हैं भक्त, 3 करोड़ का सोना पहनते हैं भगवान

khajrana ganesh mandir

चैतन्य भारत न्यूज

गणेश चतुर्थी की शुरुआत हो चुकी हैं। इस मौके पर हम आपको रोजाना भगवान गणेश के विश्वभर में प्रसिद्द कुछ खास मंदिरों के बारे में बताएंगे। इस कड़ी में हम आपको आज खजराना गणेश मंदिर के बारे में बता रहे हैं जो मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित है। यह मंदिर दुनियाभर के सबसे प्रसिद्द गणेश मंदिरों में से एक है। इस प्राचीन मंदिर का निर्माण अहिल्या बाई होल्कर ने कराया था। खजराना गणेश मंदिर में गणपति जी केवल सिंदूर से स्थापित किए गए हैं।

मान्यता है कि जब भी खजराना गणेश मंदिर में कोई दिल से मनोकामना की जाती है वह पूरी जरूरी होती है। लेकिन इस मंदिर में मनोकामना पूरी करने के लिए कुछ अलग तरीके से प्रयास करना होता है। यह पहला ऐसा मंदिर है जहां मनोकामना पूरी करवाने के लिए भक्त शास्त्रों के विपरीत काम करते हैं और जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है तो वो अपनी इस गलती का सुधार करते हैं।

गणपति के पीठ पर बनाते हैं उल्टा स्वास्तिक

खजराना गणेश मंदिर में भक्त अपनी मनोकामना पूरी करवाने के लिए गणपति बप्पा की पीठ पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। जी हां… जब मनोकामना पूरी हो जाती है तो भक्त मंदिर में आकर भगवान की पीठ पर सीधा स्वस्तिक बनाते हैं।

कहा जाता है कि खजराना मंदिर निर्माण के लिए स्थानीय पंडित मंगल भट्ट के सपने में भगवान गणेश आए थे। फिर पंडित भट्ट ने अपने इस सपने के बारे में सभी को बताया। जब यह बात रानी अहिल्या बाई होलकर तक पहुंची तो उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया और सपने के अनुसार उस जगह खुदाई करवाई। खुदाई के बाद ठीक वैसी ही भगवान गणेश की प्रतिमा प्राप्त हुई जैसी पंडित भट्ट को सपने में दिखी थी। इसके बाद साल 1735 में उसी जगह मंदिर निर्माण करवाया गया। आज यह मंदिर विश्वभर में प्रसिद्द है।

खजराना गणेश मंदिर परिसर में 33 छोटे-बड़े मंदिर बने हुए हैं। यहां भगवान राम, शिव, मां दुर्गा, साईं बाबा, हनुमानजी सहित अनेक देवी-देवताओं के मंदिर हैं। मंदिर परिसर में पीपल का एक प्राचीन पेड़ भी है। इस पीपल के पेड़ के बारे में मान्यता है कि यह मनोकामना पूर्ण करने वाला पेड़ है।

देश के सबसे धनी गणेश मंदिरों में खजराना गणेश मंदिर का नाम भी शामिल है। यहां हर साल करोड़ों रुपए का चढ़ावा आता है, जिसमें विदेशी मुद्राएं और सोने-चांदी के जेवरात भी शामिल रहते हैं। जानकारी के मुताबिक, भगवान गणेश का श्रृंगार तीन करोड़ के गहनों से किया जाता है।

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