‘समाधान निकले, इसलिए मैं अपनी जान दे रहा हूं’ कहकर एक और किसान ने की आत्महत्या, 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकालने का ऐलान

चैतन्य भारत न्यूज

केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान धरने पर हैं। 38 दिन से किसानों का धरना जारी है। कड़ाके की ठंड का उन पर कोई असर नहीं है और वे अपनी मांगों के पूरा होने तक धरना प्रदर्शन करने को कृत संकल्प हैं। इसी बीच एक किसान ने शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है।

जानकारी के मुताबिक, नगर निगम द्वारा लगवाए गए मोबाइल शौचालय में एक 75 वर्षीय बुजुर्ग किसान ने आत्महत्या कर ली। मृतक किसान का नाम कश्मीर सिंह है। 75 साल के कश्मीर यूपी के रामपुर जिले की बिलासपुर तहसील इलाके के निवासी बताए जा रहे हैं। कश्मीर सिंह के पास से सुसाइड नोट भी मिला है। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा है कि, ‘जहां उनकी मौत हुई है, वहीं उनका पोता अंतिम संस्कार करे। उनकी अंत्येष्टि दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर ही हो।’

किसान कश्मीर ने अपनी आत्महत्या के लिए सरकार को जिम्मेदार बताते हुए लिखा है कि, ‘सरकार फेल हो गई है। आखिर हम यहां कब तक यहां सर्दी में बैठे रहेंगे। सरकार सुन नहीं रही है। इसलिए मैं जान देकर जा रहा हूं। अंतिम संस्कार मेरे बच्चों के हाथों दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर होना चाहिए। मेरा परिवार, बेटा-पोता यहीं आंदोलन में निरंतर सेवा कर रहे हैं।’

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) टिकैत के प्रदेश प्रमुख बिजेंद्र यादव के अनुसार उनके ऊपर जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है कि आंदोलनरत किसानों की मांगें सरकार से मनवाई जाएं। किसान नेता अशोक धवाले ने बताया कि अब तक 50 किसानों की जान जा चुकी है।

किसान संगठनों ने आंदोलन के मद्देनजर 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकालने का ऐलान किया है। किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा कि ट्रैक्टर परेड प्रस्तावित है। यह गणतंत्र दिवस परेड के बाद निकाली जाएगी। किसान संगठनों की तरफ से यह भी कहा गया कि हम शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, कर रहे हैं और ऐसा ही करेंगे। हम लोग दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हुए हैं, लेकिन नए कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया गया है।

पंजाब, राजस्थान और कई अन्य राज्यों से किसानों के नए-नए जत्थे दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचने लगे हैं। किसान संगठनों के लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली से आ रहे हैं। वे अपने साथ राशन-पानी भी ला रहे हैं। नए जत्थों में युवाओं के अलावा महिलाएं और बच्चे भी हैं। सरकार और किसान संगठनों के बीच 4 जनवरी को अगले दौर की बातचीत होने वाली है। सरकार और किसान संगठनों के बीच दो मामलों पर सहमति बनी है, जिनमें बिजली बिल पर सब्सिडी जारी रखना और पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किया जाना प्रमुख है।

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