कुंभ संक्रांति आज, जानिए महत्व, पूजा-विधि और मंत्र

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चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म में कुंभ संक्रांति का खास महत्‍व है। इस दिन सूर्य मकर से कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं। ये एक माह का चक्र होता है। मकर संक्रांति के बाद ये सूर्य का राशि परिवर्तन है। इस बार कुंभ संक्रांति 13 फरवरी को पड़ रही है। आइए जानते हैं कुंभ संक्रांति का महत्व और पूजा-विधि।



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कुंभ संक्रांति का महत्व

मकर संक्रांति की ही तरह कुंभ संक्रांति पर भी स्नान-ध्यान, दान-पुण्य का विशेष महत्‍व है। मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन सुख-समृद्धि पाने के लिए मां गंगा का ध्यान करें। अगर आप कुंभ संक्रांति के अवसर पर गंगा नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं तो यमुना, गोदावरी या अन्य किसी भी पवित्र नदी में स्नान कर पुण्य की प्राप्ति कर सकते हैं।

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कुंभ संक्रांति पूजन-विधि

  • इस दिन सूर्योदय से पहले उठ स्नान कर सूर्यदेव की पूजा करनी चाहिए।
  • पानी में लाल चंदन मिलाकर तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाएं। साथ ही रोली, हल्दी व सिंदूर मिश्रित जल से सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
  • इसके बाद सूर्य देव को लाल फूल चढ़ाएं।
  • सूर्यदेव को गुड़ से बने हलवे का भोग लगाएं।
  • इसके बाद लाल चंदन की माला से ‘ॐ भास्कराय नमः’ मंत्र का जाप करें।
  • पूजन के बाद नैवेद्य लगाएं और उसे प्रसाद के रूप में बांट दें।

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संक्रांति के खास मंत्र

कुंभ संक्रांति को सूर्य पूजन और सूर्य मंत्र का 108 बार जाप करने से अवश्य लाभ मिलता है।

  • ॐ घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:
  • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
  • ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।
  • ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ
  • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः

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