पुण्यतिथि : वो नेता जिसकी अपील पर पूरा देश रखने लगा था हफ्ते में एक दिन व्रत, जानिए शास्त्री जी से जुड़ी कुछ खास बातें

चैतन्य भारत न्यूज

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की आज 54वीं पुण्यतिथि है। शास्त्री जी ने 11 जनवरी, 1966 को आज के ही दिन ताशकंद में अंतिम सांस ली थी। 16 साल की उम्र से हिंदुस्तान की आजादी के संग्राम में कूदने वाले शास्त्री जी ने अपना पूरा जीवन गरीबों की सेवा में समर्पित कर दिया था। आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्री जी की जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें।



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  • पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। जब शास्त्री महज डेढ़ वर्ष के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया था।
  • शास्त्री जी जब 11 वर्ष के थे तब से ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कुछ करने का मन बना लिया था। 16 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और गांधी जी के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए।
  • शास्त्री काशी विद्या पीठ में शामिल हुए। विद्या पीठ की ओर से उन्हें दी गई प्रदत्त स्नातक की डिग्री का नाम ‘शास्त्री’ था, और यही नाम आगे उनके नाम के साथ जुड़ गया और उनका पूरा नाम लाल बहादुर शास्त्री हो गया।

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  • शास्त्री ने भारत की आजादी में अहम योगदान दिया। इसके बाद भारत को सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाई। वह देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की कैबिनेट में मंत्री थे। उन्होंने रेलवे और गृह मंत्रालय जैसे बड़े विभाग को संभाला।
  • हिंदुस्तान में शास्त्री जी की वजह से ही सफेद और हरित क्रांति आई। शास्त्री जी हरित आंदोलन से पूरी तरह जुड़े हुए थे। उन्होंने अपने आवास के लॉन में भी खेती शुरू कर दी थी। उन्हें जितना जवान पसंद थे, उतने ही किसान भी पसंद थे। इसी कारण उन्होंने जय जवान, जय किसान का नारा दिया।
  • 1964 में जब शास्त्री जी प्रधानमंत्री बने। उनके शासनकाल में 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। उस समय देश में भयंकर सूखा पड़ा और खाने की चीजों को निर्यात किया जाने लगा। संकट को टालने के लिए उन्होंने देशवासियों से एक दिन का उपवास रखने की अपील की। शास्त्री जी की छवि ऐसी थी कि पूरे देश ने उनके इस फैसले का मान रखा।

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  • शास्त्री जी महात्मा गांधी को गुरु मानते थे। एक बार उन्होंने कहा था कि, ‘मेहनत प्रार्थना करने के समान है।’ शास्त्री जी महात्मा गांधी के समान ही विचार रखते थे। वह बापू की सोच से बेहद प्रभावित थे।
  • शास्त्री जी ने 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में अंतिम सांस ली थी। 10 जनवरी, 1966 को ताशकंद में पाकिस्तान के साथ शांति समझौते पर करार के महज 12 घंटे बाद (11 जनवरी) लाल बहादुर शास्त्री की अचानक मृत्यु हो गई। कुछ लोग उनकी मृत्यु को आज भी एक रहस्य के रूप में देखते हैं।

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