स्त्री रोगों में दूरबीन पद्धति से सर्जरी एक वरदान

                                                    लेखक परिचय

                                                       डॉ. सुष्मिता मुखर्जी

मेडिकल की मेधावी  छात्रा रहीं डॉ. सुष्मिता मुखर्जी एमबीबीएस, डीजीओ, एमडी और डीएनबी जैसी डिग्रियां प्राप्त कर चुकी हैं। आप इंडियन कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रिशियनंस एंड गायनेकोलोजिस्ट्स की फेलो रही हैं। डॉ. मुखर्जी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), एफओजीएसआई, इंडियन सोसाइटी ऑफ असिस्टेड रिप्रोडक्शन, इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी की आजीवन सदस्य हैं। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, हिस्टेरोस्कोपिक सर्जरी, आईवीएफ, सरोगेसी, हाई रिस्क प्रेगनेंसी में सिद्धहस्त डॉ. मुखर्जी करीब 28 सालों से मरीजों की सेवा मुस्कान के साथ कर रही हैं। 35 हजार से अधिक सर्जरी कर चुकीं डॉ. मुखर्जी को 20 से अधिक अवार्ड और सम्मान मिल चुके हैं।

लेप्रोस्कोपी या दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन मरीजों के लिए एक वरदान की तरह है। यह मिनिमल इनवेसिव सर्जरी का एक प्रकार है। इसमें पूरी सर्जरी शरीर में कुछ छेद कर, उपकरणों के माध्यम से की जाती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें आम सर्जरी की तुलना में मरीज को दर्द काफी कम होता है। इसमें काफी कम समय अस्पताल में रहना होता है और इसमें रिकवरी या स्वास्थ्य लाभ भी काफी तेजी से होता है। मरीज ऑपरेशन के अगले ही दिन चलने-फिरने की स्थिति में आ जाता है। मरीज को पतला भोजन भी दिया जा सकता है। मरीज बहुत जल्दी अपनी पुरानी नियमित दिनचर्या में लौट सकता है।

स्त्री रोग की इन स्थितियों में कारगर है लेप्रोस्कोपी

1. फाइब्रोइड्ड जैसे यूटेराइन ट्यूमर्स को निकालने में।
2. पूरे गर्भाशय को निकालने में या हिस्टेरेक्टोमी।
3. ओवेरियन सिस्ट को निकालने में।

4. एक्टोपिक प्रेगनेंसी (जब भ्रूण गर्भाशय के अलावा कहीं चिपक जाता है।
5. ट्यूबल लिगेशन (महिला की नसबंदी या फेलोपियन ट्यूब्स को बांधना) फेलोपियन ट्यूब से ही अंडा ओवरी या अंडाशय से गर्भाशय में पहुंचता है।
6. इनफर्टिलिटी या बच्चा पैदा करने में अक्षमता।
7. बंद फेलोपियन ट्यूब्स को खोलने में।
8. एंडोमिट्रियोसिस।
9. पेल्विक एबसेस (जेनाइटल ट्रैक इंफेक्शन की आखिरी और गंभीर अवस्था)
10. यूटेराइन प्रोलेप्स। (जब गर्भाशय अपनी जगह से हट जाता है। ऐसा पेल्विक फ्लोर मसल्स के कमजोर होने से होता है। वे गर्भाशय को स्थिरता नहीं दे पाती हैं)

ध्यान रखने योग्य बातें…

  • उक्त बीमारियों की सर्जरी के लिए अनुभवी सर्जन की आवश्यकता होती है। सर्जन को लेप्रोस्कोपी के अच्छे ज्ञान और प्रशिक्षण की भी आवश्यकता होती है।
  •  लेप्रोस्कोपी के उपकरण भी अच्छे होना चाहिए। इसमें कैमरा, मॉनिटर और ऊर्जा का स्रोत यानी बिजली आदि अच्छी होना चाहिए।
  • हालांकि हर सर्जरी की तरह इसमें भी कुछ कॉम्प्लीकेशंस की गुंजाइश होती है। इससे बचने के लिए गंभीरता से केस का अध्ययन, अच्छी जांच सुविधाएं, अच्छे एनेस्थीसिया विशेषज्ञ व सर्जन का चयन करना चाहिेए।

Related posts