सूरज से भी ज्यादा ऊर्जा पैदा करने वाले सबसे बड़े परमाणु फ्यूजन प्रोजेक्ट के लिए भारत ने बनाया ‘सबसे बड़ा फ्रिज’

चैतन्य भारत न्यूज

धरती पर सूरज से ज्यादा ऊर्जा पैदा करने के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के तहत भारत सबसे अहम योगदान करने जा रहा है। बता दें दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु फ्यूजन प्रोजेक्ट फ्रांस में बन रहा है। इसकी लागत करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए है। इस परमाणु संयंत्र का दिल कहा जाने वाला यंत्र क्रायोस्टेट (cryostat) को भारत बना रहा है। क्रायोस्टेट को परमाणु संयंत्र का फ्रिज भी कहा जाता है क्योंकि यह एटॉमिक ऊर्जा से निकलने वाली गर्मी, कूलेंट आदि को ठंडा रखता है।

इस क्रायोस्टेट को गुजरात के सूरत में बनाया गया है। इसे एलएंडटी ने बनाया है। क्रायोस्टेट स्टील का हाई वैक्यूम प्रेशर चैंबर होता है। जब एटॉमिक रिएक्टर बेहद गर्मी पैदा करता है तब उसे ठंडा करने के लिए एक बड़ा रेफ्रिजरेटर चाहिए होता है। इसे ही क्रायोस्टेट कहते हैं।

जानकारी के मुताबिक, इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) का सदस्य देश होने के नाते भारत ने इस क्रायोस्टेट को बनाने की जिम्मेदारी ली। पहले यह प्रोजेक्ट चीन को मिलने वाला था। लेकिन इसे भारत ने छीन लिया।

इस प्रोजेक्ट के तहत 15 करोड़ डिग्री सेल्सियस तापमान पैदा होगा, जो सूर्य की कोर से 10 गुना ज्यादा होगा। क्रायाेस्टेट का कुल वजन 3850 टन है। इसका 50वां और अंतिम हिस्सा करीब 650 टन वजनी, 29.4 मीटर चाैड़ा और 29 मीटर ऊंचा है। रिएक्टर फ्रांस के कादार्शे में बन रहा है। विश्वव्यापी लॉकडाउन के बावजूद भारत इसके हिस्से को बनाकर फ्रांस भेजता रहा था।

एटॉमिक रिएक्टर फ्रांस के कादार्शे में बन रहा है। दुनियाभर में लॉकडाउन होने के बावजूद भारत ने इस प्रोजेक्ट के लिए काम किया। इसके हिस्से फ्रांस भेजता रहा। इन सभी हिस्सों को जोड़कर चेंबर का आकार दिया जाएगा। एटॉमिक रिएक्टर में पूरे क्रायोस्टेट को जोड़ने के लिए भारतीय इंजीनियरों के लिए एक अलग वर्कशॉप भी बनाई गई है। यहां जहां पर क्रायोस्टेट के हर हिस्से को सही तरीके से जोड़कर सुरक्षा के स्तरों की जांच की जाएगी। यह एटॉमिक प्लांट भारत, अमेरिका, जापान, रूस समेत 7 देश मिलकर बना रहे है। इसे छोटा सूरज भी कहा जा रहा है।

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