मनोज मुकुंद नरवणे होंगे अगले सेना प्रमुख, संभाल चुके हैं चीन, कश्मीर और पूर्वोतर बॉर्डर की कमान

manoj mukund naravane

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. भारत को अब अपना नया सेना प्रमुख (Army Chief) मिल गया है। लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे देश के नए सेना प्रमुख होंगे। बता दें मौजूदा सेना प्रमुख बिपिन रावत 31 दिसंबर 2019 को रिटायर हो रहे हैं। इसके बाद इस पद की कमान लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे के हाथ में आ जाएगी। फिलहाल लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे सेना के उप प्रमुख हैं। सेना के 27वें चीफ बनने वाले जनरल नरवणे करीब ढाई साल तक आर्मी चीफ के पद पर बने रहेंगे। आइए जानते हैं नए सेना प्रमुख के बारे में कुछ खास बातें-



कौन हैं मनोज मुकुंद नरवणे?

22 अप्रैल 1960 को जन्में लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे के पिता मुकुंद नरवणे भारतीय वायुसेना से रिटायर हुए थे। उनकी मां सुधा नरवणे लेखिका और न्यूज ब्रॉडकास्टर थीं। पुणे के ऑल इंडिया रेडियो से वो जुड़ी हुई थीं। नरवणे ने अपनी स्कूली शिक्षा पुणे के जनाना प्रबोधिनी प्रशाला से पूरी की। इसके बाद उन्होंने नरवणे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, पुणे से उच्च शिक्षा प्राप्त की और फिर भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में दाखिला लिया। फिर उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नई से रक्षा अध्ययन में मास्टर डिग्री और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से रक्षा और प्रबंधन में एमफिल की डिग्री हासिल की है।

काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन का लंबा अनुभव

लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे को सेना में काम करने का लंबा अनुभव है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन का भी नेतृत्व किया है, साथ ही वे पूर्वोत्तर में कई बड़े ऑपरेशन संभाल हो चुके हैं, इसके अलावा डिफेंस सर्किल में उन्हें चीन के मामलों का भी एक्सपर्ट माना जाता है। जानकारी के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे का कमीशन जून 1980 में 7वीं सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट में हुआ था।

चीन से सटे बॉर्डर भी संभाल चुके हैं

आर्मी का डिप्टी चीफ बनने से पहले 31 अगस्त को वह भारत के पूर्वी कमान को संभाल रहे थे। बता दें भारतीय सेना का पूर्वी कमान चीन से सटी भारत की सीमा की रक्षा के लिए जिम्मेदार है। यहां लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ के पद पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा ऑर्मी वार कॉलेज महू में वे इंस्ट्रक्टर रह चुके हैं। साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे म्यांमार में भारत सरकार की ओर से सेवाएं दे चुके हैं।

सख्त और सतर्क अधिकारी के रूप पहचान

37 साल सेना में गुजारने वाले जनरल नरवणे के पास आतंकवाद विरोधी अभियान का खासा अनुभव है। नरवणे के पास चीन और पाकिस्तान सीमा पर काम करने का भी लंबा अनुभव है। उनकी पहचान काफी सख्त और सतर्क अधिकारी के रूप में है। सेना प्रमुख बनाए जाने पर जनरल एमएम नरवणे ने कहा है कि, ‘मुझे इस फैसले का काफी अरसे से इंतजार था। मैं काफी खुश हूं। मेरे लिए ये गर्व की बात है कि मुझे ये जिम्मेदारी दी गई है। मेरी पूरी कोशिश होगी कि मैं अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभा पाऊं।’

अब यह पद संभाल सकते हैं बिपिन रावत

बता दें सेना प्रमुख 62 साल की उम्र में या फिर सेना के सर्वोच्च पद पर 3 साल तक रहने के बाद रिटायर होते हैं। वर्त्तमान आर्मी चीफ बिपिन रावत को अब चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ बनाया जा सकता है। हालांकि, इसकी अपनी पुष्टि नहीं हुई है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल के स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में इस पद की घोषणा की थी।

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