मप्र: लिफ्ट हादसों पर रोकथाम के लिए आएगा नया कानून, विभाग ने तैयार किया मसौदा

lift accident

चैतन्य भारत न्यूज

भोपाल. 31 दिसंबर को इंदौर के पातालपानी में लिफ्ट गिरने से उद्योगपति पुनीत अग्रवाल और उनके परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद कमलनाथ सरकार मध्यप्रदेश में लेफ्ट-एस्केलेटर को लेकर कानून बनाने जा रही है।



इस कानून के तहत बहुमंजिला इमारतों में तकनीकी विशेषज्ञ की अनुमति के बाद ही लिफ्ट-एस्केलेटर लगाए जा सकेंगे। हर साल लिफ्ट-एस्केलेटर की जांच कराना भी अनिवार्य होगा। जो भी इस कानून का उल्लंघन करता पाया गया उस पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। शर्तें पूरी नहीं करने पर 1 हजार रुपए प्रतिदिन जुर्माना लगेगा। साथ ही थर्ड पार्टी बीमा भी कराना होगा।

जानकारी के मुताबिक नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस कानून का मसौदा तैयार कर लिया है। अब इसे विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जा सकता है। प्रस्तावित कानून में बनाए गए ये नियम-

  • व्यवसायिक और रिहायशी इमारतों में लिफ्ट एस्केलेटर की उम्र 20 साल होगी।
  • इसे बाद में अनिवार्य रूप से बदलना होगा।
  • हर साल लिफ्ट की सर्विसिंग भी करवानी होगी।
  • लिफ्ट इंस्पेक्टर के संचालन की एनओसी लेनी होगी।
  • यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो लिफ्ट सील करने का अधिकार होगा।
  • इस कानून के दायरे में निर्माण भवन में सामान ढोने वाली लिफ्ट भी आएगी।

जिस तरह बिल्डिंग परमिशन में आर्किटेक्ट की भूमिका होती है, ठीक उसी तरह लिफ्ट इंजीनियर की भी रहेगी। नक्शा मंजूरी के आवेदन में लिफ्ट-एस्केलेटर का ब्योरा, उपयोग में आने वाली सामग्री समेत सभी तकनीकी जानकारी देनी होगी। इसमें लिप्त इंजीनियर के हस्ताक्षर भी होंगे। नगरी निकाय को लाइसेंस निरस्त करने बिल्डिंग पर कार्रवाई जुर्माना और लिफ्ट सील करने जैसे अधिकार मिलेंगे।

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