मंदिरों में आने वाले दान पर पड़ा लॉकडाउन का असर, हर माह 3 करोड़ दान पाने वाले पद्मनाभ मंदिर में आए सिर्फ 25 हजार रुपए

चैतन्य भारत न्यूज

भारत में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस संक्रमण को देखते ही केंद्र सरकार ने 24 मार्च से ही लॉकडाउन लागू कर दिया था। लॉकडाउन के दौरान न तो किसी को घर से बाहर निकलने की इजाजत है और न ही धार्मिक स्थल और स्कूल कॉलेज खोलने की। देश के सभी बड़े मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद है और ऐसे में श्रद्धालुओं-दानदाताओं का चढ़ावा आना भी लगभग बंद है। देश के सबसे अधिक संपत्ति वाले केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (Sree Padmanabhaswamy Temple) में भी कोरोना वायरस का सबसे अधिक असर दिखाई दे रहा है। इस मंदिर में हर महीने 3 करोड़ रुपए का चढ़ावा या दान आता था, लेकिन लॉकडाउन के दौरान मंदिर में केवल 25 हजार रुपए ही दान में आए। इसी तरह देश के अन्य मंदिरों में भी लॉकडाउन के दौरान चढ़ावे पर असर हुआ है।

वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू

जम्मू के कटरा स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में हर महीने 25 से 30 करोड़ रुपए का दान आता है। जानकारी के मुताबिक, इस मंदिर में करीब 3 हजार कर्मचारी कार्य करते हैं और उनका वेतन करीब 13 करोड़ रुपए है।
इसके अलावा मंदिर के रखरखाव पर 4 से 5 करोड़ रुपए लग जाते हैं। श्राइन बोर्ड ने बताया कि, पिछले दो महीनों से कर्मचारियों को मंदिर की जमा राशि से ही वेतन दिया जा रहा है। अब श्राइन बोर्ड जल्द ही ऑनलाइन दान और प्रसाद के विकल्प पर काम करना शुरू कर देगा।

तिरुपति बालाजी, आंध्रप्रदेश

tirupati balaji

कोरोना संकट में रोजाना सबसे ज्यादा दान पाने वाले तिरुपति के वेंकटेश्वर बालाजी देवस्थानम मंदिर को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंदिर समिति के मुताबिक, बीते 2 महीनों से देश में लगे लॉकडाउन की वजह से मंदिर को अब तक 400 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। हर महीने मंदिर को 200 करोड़ का नुकसान हो रहा है। मंदिर में करीब 22 हजार कर्मचारी हैं। इनके वेतन और मंदिर के रख-रखाव और सुरक्षा पर हर महीने 110 करोड़ रुपए का खर्च आता है। मंदिर समिति ने बताया कि, वह जमा पूंजी में से मई का वेतन तो दे देंगे लेकिन जून से वह नए स्त्रोतों की तलाश करेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि मंदिर के फिक्स डिपॉजिट व जमा सोने का इस्तेमाल परंपरा के विरुद्ध होगा।

साई बाबा मंदिर, शिरडी

sai baba

महाराष्ट्र के शिरडी के साई बाबा मंदिर ट्रस्ट की सालाना आय करीब 700 करोड़ रुपए है। लॉकडाउन की वजह से यहां पिछले दो महीने से लोगों की आवाजाही पूरी तरह से बंद है। इन दो महीनों में ट्रस्ट को ऑनलाइन करीब ढाई करोड़ रुपए का दान मिला है। साई मंदिर में 6 हजार कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अब कर्मचारियों को वेतन देने के लिए ट्रस्त को एफडी तुड़वानी पड़ रही है। मंदिर के पास करीब 2500 करोड़ रुपए की एफडी है।

सिद्धि विनायक मंदिर, मुंबई

मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर में बीते दो महीने में दान की आवक 90% तक घटी है। इस मंदिर में करीब 150 कर्मचारी हैं। उनके वेतन और मंदिर के रख-रखाव समेत हर महीने करीब 6-7 करोड़ रुपए का खर्च है।
सिद्धि विनायक मंदिर की सालाना आय 410 करोड़ रुपए के करीब है।

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