40 सालों में एक बार जल समाधि से बाहर निकलते हैं भगवान अती वरदार, 48 दिन भक्तों को देते हैं दर्शन

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चैतन्य भारत न्यूज

भारत के हर राज्य में अलग-अलग परंपराएं निभाई जाती हैं। यहां हर चार कदम पर भाषा और लोगों के रहन-सहन में बदलाव हो जाता है। हमारे देश में कई तरह के रीति-रिवाज भी देखने को मिलते हैं। दक्षिण से लेकर उत्तर भारत तक कई मंदिर और धार्मिक स्थल हैं जिनकी अपनी ही एक कहानी होती है। हम आपको आज एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बता रहे हैं जो तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित है। यहां जो भगवान हैं वह 40 सालों में एक बार कुछ दिनों के लिए भक्तों को दर्शन देने जल समाधि से बाहर आते हैं।

देश-विदेश से आए भक्त

इस मंदिर का नाम है भगवान वरदराजा स्वामी मंदिर। यहां भगवान अती वरदार की मूर्ति स्थापित है। भगवान अती वरदार अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए 40 साल में एक बार कुछ दिनों के लिए जल समाधि से बाहर आते हैं। इसी के साथ कांची अती वरदान नामक महोत्सव भी शुरु हो जाता है। इस बार महोत्सव की शुरुआत 3 जुलाई से हुई है। ऐसे में लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान अती वरदार के दर्शन के लिए जुटे हैं। यहां देश-विदेश से आए भक्तों का मेला लगा हुआ है।


48 दिन कर सकेंगे दर्शन

भगवान एक बार जल समाधि से बाहर निकलने के बाद 48 दिनों तक बाहर ही रहकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इस साल भगवान के अंतिम दर्शन 19 अगस्त को होंगे और फिर अगले दिन यानी 20 अगस्त को भगवान अती वरदार दोबारा मंदिर के पवित्र तालाब में जल समाधि ले लेंगे। इसके बाद भक्तों को भगवान के दर्शन करने के लिए 40 सालों का इंतजार करना पड़ेगा। यही वजह है कि भगवान अती वरदार के दर्शनों के लिए विदेशों से भी भक्त खिंचे चले आते हैं।

जल समाधि की कई कहानियां हैं प्रचलित

भगवान अती वरदार की जलसमाधि को लेकर कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं। पहली कहानी है कि, सालों पहले मंदिर के एक पुजारी को भगवान ने नींद में दर्शन दिए और उनसे कहा कि उन्हें पानी में डाल दीजिए। इसके अलावा दूसरी कहानी में बताया गया है कि, इस मूर्ति को उस वक्त बनाया गया था, जब मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ था। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद मूर्ति को पानी में डाल दिया गया था। बता दें भगवान अती वरदार की मुर्ति अंजीर के पेड़ की लकड़ी से बनी हुई है।

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