‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ के रचियता गीतकार अभिलाष का निधन, लिवर कैंसर से थे पीड़ित, परिवार के पास नहीं थे ट्रांसप्लांट के पैसे

चैतन्य भारत न्यूज

मुंबई. ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ जैसे गीत लिखने वाले गीतकार अभिलाष का मुंबई में निधन हो गया है। उन्होंने रविवार को अंतिम सांस ली। जानकारी के मुताबिक, अभिलाष पिछले काफी समय से लिवर कैंसर से जूझ रहे थे और वह बीते 10 महीने से बिस्तर पर ही थे। उनका लिवर ट्रांसप्लांट किया जाना था लेकिन पैसों की तंगी के कारण यह नहीं हो सका।

उनके मुख्य गीतों में ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’, ‘संसार है एक नदिया’ और ‘आज की रात न जा’ सहित अन्य शामिल हैं। अभिलाष को पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह द्वारा कलाश्री अवार्ड से सम्मानित भी किया गया था। अभिलाष का विश्व प्रसिद्ध गीत ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ भारत के सैकड़ों स्कूलों में प्रार्थना गीत के रूप में गाया जाता है। विश्व की आठ भाषाओं में इस गीत का अनुवाद हो चुका है। अन्य भाषाओं में भी ये गीत प्रार्थना गीत के रूप में गाया जाता है।

पत्नी ने IPRS से आर्थिक मदद मांगी थी

अभिलाष की सेहत के बारे में दो दिन पहले ही जानकारी सामने आई थी। उनकी पत्नी नीरा अभिलाष ने इंडियन परफॉर्मिंग राइट्स सोसाइटी (IPRS) से अर्जेंट फाइनेंशियल मदद मांगी थी। रिपोर्ट्स में परिवार के सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि परिवार ने अपनी पूरी जमा-पूंजी अभिलाष की देखरेख में खर्च कर दी थी। शुरुआत में उन्हें शुभचिंतकों से मदद मिल रही थी। लेकिन वे भी ज्यादा दिनों तक खर्च नहीं उठा सके। क्योंकि लिवर कैंसर का खर्च काफी महंगा है।

ये गाने भी हैं लोक्रप्रिय

अभिलाष ने ‘रफ्तार’ (1975), ‘जहरीली’ (1977), ‘सावन को आने दो’ (1979),’लाल चूड़ा’ (1974), ‘अंकुश’ (1986), ‘हलचल’ (1995) और ‘मोक्ष’ (2013) जैसी फिल्मों के लिए गाने लिखे थे। इसके अलावा ‘जय जगन्नाथ’ (2007) के डायलॉग्स और ‘जीते हैं शान से’ (1988) की एडिशनल स्टोरी के लिए भी उन्हें क्रेडिट दिया गया है। ‘वो जो खत मुहब्बत में’, ‘तुम्हारी याद के सागर में’ ‘संसार है इक नदिया’, ‘तेरे बिन सूना मेरे मन का मंदिर’ आदि गीत भी लिखे थे, जो काफी लोकप्रिय हुए थे। गीतों के अलावा उन्होंने कई फिल्मों में बतौर पटकथा-संवाद लेखक भी योगदान दिया था और कई टीवी धारावाहिको़ं की स्क्रिप्ट लिखी थीं।

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