उपचुनाव: मप्र, उप्र, ओडिशा और गुजरात में 3 नवंबर को होंगे मतदान, 10 को आएंगे नतीजे

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चैतन्य भारत न्यूज

भोपाल. चुनाव आयोग ने मंगलवार को 56 विधानसभा सीटों और एक लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, नगालैंड, तेलंगाना, और उत्तरप्रदेश की 54 सीटों पर 3 नवंबर को मतदान होगा। जबकि बिहार की एक लोकसभा सीट और मणिपुर की दो विधानसभा सीटों पर 7 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। 10 नवंबर को इनके नतीजे आएंगे। हालांकि, चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की 7 सीटों पर उपचुनाव नहीं होगा।

16 अक्टूबर को नामांकन की आखिरी तारीख

बता दें मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर चुनाव होना है। 10 नवंबर को नतीजे आएंगे। 16 अक्टूबर को नामांकन करने की अंतिम तारीख होगी। मध्यप्रदेश के उपचुनावों में भाजपा अपनी सत्ता बचाने और कांग्रेस नेता कमलनाथ छह महीने पहले खोई सत्ता वापस पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस उपचुनाव में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया की साख भी दांव पर लगी है, क्योंकि जिन 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहा है उनमें 16 सीटें सिंधिया के प्रभाव वाले ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की है।

प्रदेश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर उपचुनाव हो रहे हैं

बता दें प्रदेश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर उपचुनाव होंगे। इसकी सबसे बड़ी वजह है मार्च में हुए राजनीतिक फेरबदल। दरअसल, 10 मार्च को ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस के 22 विधायकों पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद अल्पमत में आई कमलनाथ सरकार गिर गई थी। कांग्रेस विधायकों के इस्तीफा देने से 22 सीटें खाली हो गई थीं। इसके बाद जुलाई में बड़ा मलहरा से कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी और नेपानगर से कांग्रेस विधायक सुमित्रा देवी कसडेकर भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आ गए। फिर मांधाता विधायक ने भी कांग्रेस छोड़ भाजपा का झंडा पकड़ लिया। इसके अलावा, तीन विधायकों का निधन हो गया। यानी कुल 28 विधानसभा सीटें खाली हो गईं।

28 में से 27 सीटों पर पहले था कांग्रेस का कब्जा

मध्यप्रदेश में जिन 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है, उनमें से 27 पर पहले कांग्रेस का कब्जा था। प्रदेश में 230 सदस्यीय राज्य विस में बहुमत के लिए 116 सीटें होना जरूरी हैं। अगर भाजपा उपचुनाव में बेहतर प्रदर्शन करती है तो उसकी सरकार और स्थिर होगी। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस की कोशिश है कि वह 20 या उससे ज्यादा सीटें जीत ले, जिससे की एक बार सत्ता में लौट आए।

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