दिग्विजय सिंह के एक ट्वीट से शुरू हुआ MP में पॉलिटिकल ड्रामा, जानें सियासी संग्राम के बारे में सबकुछ

चैतन्य भारत न्यूज

भोपाल. मध्य प्रदेश में चल रहा सियासी संकट अब थम गया है। शुक्रवार को कमलनाथ ने आख़िरकार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। बता दें मध्य प्रदेश में यह सियासी ड्रामा दिग्विजय सिंह के ट्वीट के साथ शुरू हुआ था। दिग्विजय ने बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप लगाए और कहा कि, ‘कांग्रेस विधायकों को दिल्ली ले जाया गया।’


दिग्विजय सिंह के ट्वीट से शुरू हुआ ड्रामा 

इस हाई प्रोफाइल ड्रामे की शुरुआत दिग्विजय के महिला विधायक को लेकर एक ट्वीट से हुई। 3 मार्च को बसपा की महिला विधायक रामबाई को लेकर दिग्विजय सिंह ने अपने एक ट्वीट के जरिए शिवराज सिंह चौहान से पूछा था कि, ‘आपके नेता बसपा विधायक रामबाई को चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली ले गए हैं या नहीं?’ इसके बाद यह बात सामने आई कि कांग्रेस के कई विधायक गायब हैं और भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं।

शिवराज ने दिया जवाब 

दिग्विजय सिंह के ट्वीट का शिवराज सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि, ‘मुख्यमंत्री कमलनाथ को ब्लैकमेल करने के इरादे से दिग्विजय सिंह ऐसे आरोप लगा रहे हैं। यह उनकी आदत रही है। उनके कुछ काम नहीं हो रहे होंगे, इसलिए अपना महत्व बताने के लिए वे इस तरह की बातें कर रहे हैं।’

हरियाणा और बेंगलुरु में मिले बागी विधायक 

3 और 4 मार्च की दरमियानी रात को हरियाणा से यह खबर सामने आई कि आईटीसी ग्रांड मानेसर होटल में कांग्रेस के चार, बसपा के दो और एक अन्य विधायक ठहरे हुए हैं। इसके अलावा कुछ विधायक बेंगलुरू में ठहरे हैं। जैसे ही इस बात की भनक मुख्यमंत्री कमलनाथ को लगी तो वे हरकत में आ गए और अपने चार मंत्रियों को हरियाणा भेजा। वहां खूब हंगामा हुआ। कांग्रेस या उसको समर्थन दे रहे कुल 8 विधायकों के बागी होने की सूचना।

होली पर सिंधिया का इस्तीफा 

फिर कांग्रेस को यह बात पता चली कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक 19 विधायक अपनी ही सरकार से नाराज हैं। वे सभी बेंगलुरु में हैं। इसके बाद कांग्रेस ने सिंधिया को मनाने की कोशिश करना शुरू कर दी। इस सियासी घमासान का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब होली के दिन कांग्रेस के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उनके साथ सिंधिया समर्थक 6 मंत्री और 13 विधायकों ने इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष को भेज दिया। वहीं भोपाल में 2 और विधायकों ने पार्टी छोड़ दी। इसके बाद कमलनाथ सरकार संकट में आ गई।

11 मार्च को हुई कांग्रेस-भाजपा की बैठक 

11 मार्च को भोपाल में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। इस बैठक में सिर्फ 93 विधायक ही पहुंचे। इससे साफ हो गया कि कमलनाथ सरकार संकट में है। फिर उसी समय दिल्ली में भाजपा चुनाव समिति की बैठक हुई, जिसमें पीएम मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी समेत सभी बड़े नेता शामिल हुए।

सिंधिया भाजपा में हुए शामिल 

फिर 11 मार्च को ज्योतिरादित्य सिंधिया आखिरकार दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में भाजपा में शामिल हो गए। सदस्यता ग्रहण करने के बाद सिंधिया ने पीएम मोदी और अमित शाह की तारीफ की। भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के कुछ ही घंटों बाद पार्टी ने सिंधिया को मध्यप्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार घोषित कर दिया।

कांग्रेस विधायकों को जयपुर भेजा 

बैठक के बाद 11 मार्च की रात भाजपा ने अपने विधायकों को दिल्ली तो कांग्रेस ने जयपुर रवाना कर दिया। इस दौरान कांग्रेस लगातार यह दावा कर रही थी कि कमलनाथ सरकार पर कोई संकट नहीं है। सभी विधायक साथ हैं।

राज्यसभा के लिए सिंधिया का नामांकन 

12 मार्च को सिंधिया भोपाल पहुंचे तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। उन्हों एयरपोर्ट से भाजपा कार्यालय तक रोड शो भी निकाला। मुख्यालय पहुंचकर सिंधिया ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया।

राज्यपाल ने दिया फ्लोर टेस्ट का आदेश 

14 मार्च की देर रात राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को एक पत्र लिखकर कहा कि, ‘उन्हें पूरी तरह भरोसा हो गया है कि सरकार अल्पमत में है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर है, इसलिए संवैधानिक रूप से अनिवार्य एवं प्रजातांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवश्वयक हो गया है कि दिनांक 16 मार्च 2020 को मेरे अभिभाषण के तत्काल बाद आप विधानसभा में विश्वासमत हासिल करें।’

6 मंत्रियों के इस्तीफे मंजूर 

बता दें कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक 22 विधायक बेंगलुरु में ठहरे हैं। इनमें 6 मंत्री भी शामिल हैं। इन सभी 22 विधायकों ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। विधानसभाध्यक्ष एन पी प्रजापति ने छह विधायक जो राज्य मंत्री भी थे उनके इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं।

बीजेपी-कांग्रेस के सभी विधायक भोपाल आए  

16 मार्च से विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो गया। इससे पहले रविवार देर रात करीब 2 बजे मानेसर (गुरुग्राम) भेजे गए करीब 100 से ज्यादा बीजेपी विधायक वापस भोपाल लौट आए हैं। वहीं जयपुर में ठहरे कांग्रेस के 85 विधायक भी रविवार को भोपाल पहुंच गए हैं। ये सभी विधायक सोमवार को सदन की कार्यवाही में हिस्साह लेंगे। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक विधायक बेंगलुरु के रिसॉर्ट में ठहरे उनके खेमे के 22 विधायक भी सोमवार सुबह भोपाल पहुंच सकते हैं।

कांग्रेस फ्लोर टेस्ट से भाग रही- शिवराज 

15 मार्च की देर रात तक गहमागहमी जारी रही। सीएम कमलनाथ ने रविवार रात राज्यपाल टंडन से मुलाकात की। इसके बाद कमलनाथ ने कहा कि फ्लोर टेस्ट का फैसला विधानसभा अध्यक्ष लेंगे। इधर शिवराज सिंह चौहान ने कहा, सरकार फ्लोर टेस्ट से भागे नहीं और फ्लोर टेस्ट करवाए।

विधानसभा सत्र स्थगित

सोमवार को विधानसभा में कमलनाथ सरकार का फ्लोर टेस्ट (शक्ति परीक्षण) होना था लेकिन अब विधानसभा की कार्यवाही को 26 मार्च तक के लिए टाल दिया गया है। राज्यपाल लालजी टंडन ने अपने अभिभाषण में विधायकों से नियम का पालन करने को कहा।

मप्र विधानसभा का गणित 

बता दें मध्यप्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से दो सीट खाली हैं, जिसके बाद कुल संख्या 228 है। 6 विधायकों के इस्तीफे मंजूर होने के बाद यह संख्या 222 हो गई है।

बीजेपी का अंक गणित

  • बीजेपी के पक्ष में 7 निर्दलीय विधायक आ जाएं तो संख्या 107+7=114 बहुमत 112 से दो ज्यादा।
  • यदि कांग्रेस के सभी बागी बीजेपी के साथ चले जाते हैं तो इनकी संख्या 107+16 =123 हो जाएगी।

कांग्रेस का अंक गणित

  • यदि कांग्रेस के साथ 7 निर्दलीय आते हैं तो सरकार की संख्या 92+7=99 होगी।
  • यदि बीजेपी के दो विधायक कमलनाथ सरकार का साथ देते हैं तो आंकड़ा 99+2=101 हो जाएगा।
  • यदि 16 बागी विधायकों में से 5 या 6 वापस आते हैं तो भी सरकार 107 की संख्या तक पहुंच जाएगी।

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