मप्र विधानसभा में पप्पू, फेंकू और मामू जैसे कई शब्दों के प्रयोग करने पर बैन

चैतन्य भारत न्यूज

भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से प्रारंभ हो रहा है। विधायकों को विधानसभा में अब अपनी बात रखते समय शब्दों के चयन और भाषा का मर्यादा का ध्यान रहना होगा। विधानसभा में शब्दों की आचार संहिता लगा दी गई है। अब सदन की कार्यवाही के दौरान माननीय बंटाधार, पप्पू, फेंकू, मामू, मंदबुद्धि और झूठा जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं कर सकेंगे। विधानसभा ने 1954 से अब तक के इतिहास में सदन में विधायकों द्वारा बोले गए 1161 वाक्य अससंदीय घोषित कर दिया है, जिनमें चोर, उचक्का, 420, झूठ, चोर, पागल, बकवास, भ्रष्ट, शैतान, लफंगा जैसे शब्द शामिल है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने विधानसभा की इस पहल का स्वागत किया है।

संसदीय शब्द एवं वाक्यांशी संग्रह पुस्तक तैयार

विधानसभा सचिवालय ने संसदीय शब्द एवं वाक्यांश संग्रह पुस्तक तैयार की है। इसका विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने विधानसभा में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में विमोचन किया। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा, कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक डॉक्टर गोविंद सिंह सहित विधानसभा के वरिष्ठ सदस्य और अधिकारी मौजूद थे।

विधानसभा की बैठकों में सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के दौरान असंसदीय भाषा का प्रयोग करते हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष को अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए ऐसे शब्दों को कार्यवाही से बाहर करना पड़ता है, लेकिन अब ऐसे शब्द का इस्तेमाल विधानसभा में नहीं हो सकेगा।

सदन की कार्यवाही देखकर बच्चों ने कहा था- मछली बाजार: शिवराज

कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विधानसभा में सत्र की कार्यवाही देखने कॉलेजों के बच्चे भी आते हैं, लेकिन वे कार्यवाही देखकर निराश होते हैं। विधानसभा की कार्यवाही को मछली बाजार समझा जाता है। बच्चों से जब मैंने सदन की कार्यवाही के अनुभव को लेकर पूछा था, तब एक छात्र ने यह टिप्पणी की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा महज ईंट-गारे का भवन नहीं, लोकतंत्र का मंदिर है। कई बार विधानसभा में बहस के दौरान शब्दों का चयन ऐसा हो जाता है जो सामान्य शिष्टाचार के अंतर्गत नहीं आता।

किताब के जरिए क्यों समझाना पड़ रहा, इसे समझें: कमलनाथ

कमलनाथ ने कहा कि हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। प्रजातंत्र की नींव लोकसभा और विधानसभा है। सदन में अनेकता में एकता हर बार दिखाई देती है। एक झंडे के नीचे सभी विविधताएं एक सूत्र में बंध जाती हैं। देश की संस्कृति को बनाए रखना सदन की जिम्मेदारी है।

शब्दों और वाक्यों की सूची बनाई: गिरीश गौतम

विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा कि विधानसभा के लिए शब्दों और वाक्यों की सूची बनाई गई है, जो आमतौर पर सदन में विधायकों द्वारा एक-दूसरे पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। झूठा जैसा शब्द असंवेदनशील है। विधायकों को ‘असत्य’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए। ये वे शब्द हैं, जिन्हें सदन की कार्यवाही के दौरान विलोपित करना पड़ता है। इन शब्दों का उपयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 105 (2) के तहत संसद सदस्यों द्वारा नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रियल हीरो कहे जाने वाले अभिनेताओं को अपनी बात कहने में गलती होने पर उसमें सुधार के लिए रीटेक का मौका मिलता है, लेकिन जनता के रियल हीरो बने विधायकों को सदन में गलत बात कहने पर रीटेक का मौका नहीं मिलता। इसलिए सदन में असंसदीय शब्दों के उपयोग को रोकने के लिए वाक्यांश संग्रह तैयार किया गया है।

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