महाकाल मंदिर परिसर की खुदाई में मिले 1 हजार साल पुराने मंदिर के अवशेष

चैतन्य भारत न्यूज

महाकाल की नगरी उज्जैन में शनिवार को कोई चमत्कार तो नहीं हुआ, लेकिन जो हुआ वो किसी चमत्कार से कम भी नहीं था। महाकाल मंदिर का पिछले एक साल से विस्तारीकरण चल रहा है, जिसका काम अचानक रोक दिया गया।

जानकारी के मुताबिक, महाकाल मंदिर के समीप खुदाई में एक हजार साल पुराना मंदिर मिला है। मंदिर की दीवारों और पत्थरों पर बाकायदा नक्काशी की हुई है। सूचना मिलते ही पुरातत्व विभाग सहित कई विभागों के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए।

दरअसल महाकाल मंदिर के पूर्वी द्वार की तरफ इन दिनों खुदाई का काम चल रहा है जहां से आम दर्शनार्थियों के लिए प्रवेश की व्यवस्था किया जाना प्रस्तावित है। इसी खुदाई के दौरान जमीन से करीब 20-25 फीट की एक बेहद पुरानी दीवार के अवशेष मिले तो खुदाई रोक दी गयी। खुदाई में मिली दीवार पर फूलों की नक्काशी भी है। फिलहाल खुदाई रुकी हुई है और अब पुरातत्व विभाग की निगरानी में ही आगे की खुदाई होगी। यह मंदिर के मूल निर्माण का भी हिस्सा हो सकता है। आगे खुदाई जारी रहने पर विक्रमादित्य और उनके काल से भी पुरासंपदा मिल सकती है। यह भारतीय धर्म, परंपरा, स्थापत्यकला व प्राचीन इतिहास को समझने में सहायक होगी।

मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जुनवाल ने शनिवार को बताया कि, महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर सती मंदिर के पास प्रतीक्षा क्षेत्र, बगीचे और अन्य सुविधाओं को बनाने के लिये शुक्रवार को खुदाई 20 फीट तक पहुंच गयी, तभी वहां कुछ पुरातन सीढ़ियां और मंदिर के अवशेष दिखाई दी जिसके बाद खुदाई रोक दी गयी। पुरातन अवशेष सामने आने पर खुदाई रोक दी गयी और पुरातत्वविद् डॉ. रमन सोलंकी को इन प्राचीन संरचनाओं के बारे में सूचित कर दिया गया।’’ उन्होंने कहा कि सोलंकी द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद खुदाई फिर से शुरू की जायेगी।’

डॉ. रमन सोलंकी ने बताया कि, ‘ये अवशेष 1000 साल पुराने हो सकते हैं, क्योंकि इसको देखकर और इसकी बनावट से लगता है कि ये राजा भोज यानी परमार काल के हो सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि, ‘इस मंदिर की और गहराई एवं चारों तरफ़ खुदाई की जाये तो संभवतः 2600 साल पहले के जो शासक रहे थे, उनके निर्माण और यहां तक की उज्जैन के राजा रहे विक्रमादित्य के काल के अवशेष भी निकल सकते हैं।’

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