महाशिवरात्रि 2020 : उज्जैन के राजा हैं महादेव तो रूद्र के रूप हैं काशी के कोतवाल

baba mahakal

चैतन्य भारत न्यूज

उज्जैन का एक ही राजा है और वह हैं बाबा महाकाल। बाबा महाकाल 12 ज्योतिर्लिंगों में से सबसे प्रमुख हैं। मान्यता है कि यही म्रत्यु लोक के राजा हैं और इनके दर्शन से अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। बाबा महाकाल को अवंतिकाराज के रूप में सदियों से पूजा जा रहा है। स्टेट के समय तत्कालीन सिंधिया राजवंश के सदस्य महाकाल की अंवतिकानाथ के रूप में पूजा किया करते थे और स्वतंत्रता मिलने के बाद इस परंपरा का निर्वहन जिला कलेक्टर करने लगे।


प्रजा का हाल जानने निकलते हैं बाबा महाकाल

हर साल श्रावण-भादौ और कार्तिक-अगहन मास में बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने चांदी की पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं। भक्त उनकी एक झलक पाकर अपने आपको धन्य समझते हैं। महाकाल मंदिर के मुख्यद्वार पर मध्यप्रदेश पुलिस की सशस्त्र बल की टुकड़ी राजाधिराज को सलामी देती है। महाशिवरात्रि के पर्व पर भगवान महाकाल की शासकीय पूजन की परंपरा है। इस बार 21 फरवरी को महाशिवरात्रि है और इस अवसर पर दोपहर 12 बजे शासन की ओर से डीएम महाकाल की पूजा अर्चना करेंगे। फिर शाम 4 बजे सिंधिया व होलकर राजवंश द्वारा भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की जाएगी।

थाने की कुर्सी पर काशी के कोतवाल

भोले बाबा को काशी के पुराधिपति तो बाबा कालभैरव को उनकी नगरी का कोतवाल कहा जाता है। शिव पुराण में कहा गया है कि कालभैरव भगवान शंकर के ही रूप हैं। पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक, काशी में काल भैरव को स्वयं महादेव ने नियुक्त किया था। काशी में प्रवेश करने और वहां रहने के लिए हर किसी को बाबा भैरव की आज्ञा लेनी होती है। जी हां… यह मजाक नहीं बल्कि सच है। बता दें काशी के कोतावली पुलिस थाने में SHO की कुर्सी पर बाबा काल भैरव बैठते हैं। सालों से यहां ये परंपरा चली आ रही है। काशी में काल भैरव के दर्शन किए बिना बाबा विश्वनाथ के दर्शन अधूरे होते हैं।

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