महाशिवरात्रि 2020 : आज देवों के देव महादेव का दिन, जानिए शिवरात्रि व्रत के नियम और पूजा का तरीका

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चैतन्य भारत न्यूज

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में भगवान शिव के प्रति सच्‍ची आस्‍था और श्रृद्धा का पर्व माना जाता है। इस बार महाशिवरात्रि 21 फरवरी, शुक्रवार की है। कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन श्रद्धा से व्रत रखते हैं उन्हें भगवान शिव की कृपा मिलती है। लेकिन व्रत के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। भगवान शिव की पूजा में भक्‍तजन जाने-अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनके कारण उनकी पूजा या तो अधूरी मानी जाती है या फिर पूजा का पूर्ण फल नहीं प्राप्‍त होता। इसलिए आप पूजा के दौरान इन बातों का ध्यान रखें।



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महाशिवरात्रि पूजा के नियम

  • भगवान शिव के मंदिर में यदि आप शाम के वक्‍त दर्शन करने जा रहे हैं तो शाम के वक्‍त जल न चढ़ाएं। शास्‍त्रों के अनुसार शाम का पहर शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए उपयुक्‍त नहीं होता है। जलाभिषेक सुबह की पूजा में करने का विधान है।
  • भगवान शिव की पूजा में शंख का प्रयोग नहीं किया जाता है। मान्यता है कि, भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्‍य का वध किया था और शंख को उसी राक्षस का अंश माना जाता है। इसलिए शिव पूजा के दौरान शंख नहीं बजाना चाहिए।
  • शिवलिंग का अभिषेक करते समय ‘ओम नम: शिवाय’ का जाप करना चाहिए।
  • इसके बाद बिल्व -पत्र, धतूरा, फल और फूल अर्पित करना चाहिए। इस दिन भगवान शिव को बेर चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।

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महाशिवरात्रि व्रत के नियम

  • महाशिवरात्रि के दिन सुबह उठकर स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें और व्रत का संकल्‍प लें।
  • इसके बाद शिव मंदिर जाएं या घर के मंदिर में ही शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
  • पूरा दिन भगवान शिव के चरणों में भक्ति के साथ बिताना चाहिए।
  • अगर आप पूरे दिन निराहार व्रत रखना चाहते हैं तो अगले दिन स्नान करके व्रत का पारण कर सकते हैं।
  • इस बीच रात्रि में भोले शंकर का जागरण करना चाहिए। कहा जाता है कि शिवरात्रि में संपूर्ण रात्रि जागरण करने से महापुण्य फल की प्राप्ति होती है।
  • शिवजी को शमी, आक, पलाश और सदाबहार के पुष्‍प प्रिय होते हैं।

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