पुण्य तिथि : सरल स्वभाव और अहिंसा के पुजारी थे महात्मा गांधी, जानें ‘राष्ट्रपिता’ से जुड़ी कुछ खास बातें

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चैतन्य भारत न्यूज

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 72वीं पुण्यतिथि है। 30 जनवरी 1948 को आज ही के दिन नाथूराम गोडसे ने उनकी छाती पर तीन गोलियां बरसा कर हत्या कर दी थी। आज हम आपको बताने जा रहे हैं महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें…



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  • राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है। गांधी जी के पिता का नाम करमचंद उत्तमचंद गांधी था और वो पोरबंदर के दीवान थे। महात्मा गांधी को प्यार से बापू भी कहते हैं।
  • वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सबसे प्रमुख व्यक्ति थे। गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए पूरे देश को 200 वर्षो की अंग्रेजों की गुलामी के बाद आजादी दिलावाई थी।

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  • उनके कार्यों और विचारों ने देश को आजादी दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। यही वजह है कि भारत में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस की तरह 2 अक्टूबर को भी राष्ट्रीय पर्व का दर्जा हासिल है।
  • 24 वर्ष की उम्र में गांधी जी दक्षिण अफ्रीका गए थे। उन्होंने वहां कानून की पढ़ाई की थी। दक्षिण अफ्रीका से उनकी वापसी 1915 में हुई। फिर गांधी जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और अपनी मेहनत के दम पर वह कुछ ही समय में कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए।
  • गांधी जी ने न सिर्फ भारत की स्वतंत्रता के लिए प्रयास किया, बल्कि उन्होंने समाज में फैली अस्पृश्यता, जातिवाद, स्त्री अधीनता जैसी और भी कई बुराइयों का भी डटकर मुकाबला किया। इसके अलावा, उन्होंने गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए भी महत्वपूर्ण प्रयास किए।

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  • गांधी जी ने 8 अगस्त, 1942 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों को देश से भगाने के लिए भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की थी। इस आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ पर भाषण दिया था।
  • 30 जनवरी 1948 को बिरला हाउस में शाम की प्रार्थना के समय नाथूराम गोडसे ने 78 वर्षीय महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
  • महात्मा गांधी वीवीआईपी कल्चर और नेताओं को दी जाने वाली सुरक्षा के सख्त खिलाफ थे। यहां तक कि जब केंद्र सरकार ने उन पर जान के खतरे की आशंका जताते हुए सुरक्षा की आवश्यकता बताई थी, तब भी उन्होंने इनकार कर दिया था।

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  • महात्मा गांधी की मृत्यु के बाद उनकी शव यात्रा में करीब 10 लाख लोग शामिल हुए। 15 लाख लोग शव यात्रा के रास्ते में खड़े हुए थे। उनकी शव यात्रा भारत के इतिहास में सबसे बड़ी शव यात्रा थी। लोग खंभों, पेड़ और घर की छतों पर चढ़कर बापू को एक नजर देखना चाहते थे।

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