जानिए मकर संक्रांति का महत्त्व, इन मंत्रों के जाप से करें सूर्य देव की उपासना

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चैतन्य भारत न्यूज

धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिए से मकर संक्रांति का बड़ा ही महत्व है। मकर संक्रांति के दिन दान करना काफी शुभ माना गया है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को ही मकर संक्रांति कहते हैं। आइए जानते हैं मकर संक्रांति का महत्व और इसके खास मंत्र।



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मकर संक्रांति का महत्व

इस दिन पुण्य काल के समय में तीर्थ स्नान, दान, जाप, हवन, तुलादान, गौदान, स्वर्ण दान का विशेष महत्व है। गरीबों को कंबल, ब्राह्मणों को खिचड़ी एवं तिल गुड़ का पात्र भरकर दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। स्नान के पूर्व शरीर पर तिल का उबटन लगाकर स्नान करने से आरोग्य की वृद्धि होती है। ‘संक्रांति’ का शाब्दिक अर्थ है, सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना। अत: वह राशि जिसमें सूर्य प्रवेश करता है, संक्रांति के नाम से जानी जाती है। इसी तरह सूर्य जब धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है तो ‘मकर संक्रांति’ होती है।

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संक्रांति के खास मंत्र

मकर संक्रांति को सूर्य पूजन और सूर्य मंत्र का 108 बार जाप करने से अवश्य लाभ मिलता है।

  • ॐ घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:
  • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
  • ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।
  • ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ
  • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः

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