5 बीवियों के शौक पूरे करने के चक्कर में 50 युवतियों को बनाया निशाना, की दो करोड़ की ठगी

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चैतन्य भारत न्यूज

भोपाल. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में नर्स के पद पर भर्ती कराने का झांसा देकर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश हो गया है। मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने इस गिरोह के सरगना सहित दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों ने न सिर्फ नर्सिंग के विद्यार्थियों को भरोसा दिलाने के लिए फर्जी चयन सूची बनाई थी, बल्कि उन्होंने तो चंडीगढ़, दिल्ली और भोपाल एम्स में भर्ती कराने के नियुक्ती पत्र भी तैयार कर लिए थे।


नौकरी के बदले 4 से 6 लाख रुपए तक की मांग

एसटीएफ अफसराें के मुताबिक, करीब एक हफ्ते पहले नर्सिंग की पढ़ाई कर रही भाेपाल की चार युवतियाें ने भाेपाल और दिल्ली एम्स में नाैकरी दिलाने के नाम पर ठगी हाेने की शिकायत एडीजी एसटीएफ अशाेक अवस्थी से की थी। नर्सिंग की पढ़ाई पूरी होने के बाद युवतियां बेहतर नौकरी की तलाश कर रही थीं। इसी बीच कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया और एम्स में नौकरी दिलवाने की बात कही। इस नौकरी के एवज में ठगों ने युवतियों से 4 से 6 लाख रुपए तक की मांग की थी। रुपए देने के बाद आरोपितों ने युवतियों को एम्स की चयन लिस्ट भी दिखाई थी। कुछ युवतियों को भरोसा दिलाने के लिए दिल्ली एम्स में घुमाया भी गया। उस लिस्ट में युवतियों का नाम भी था। फिर आरोपितों ने तय रकम हासिल करने के बाद युवतियों को एम्स में भर्ती का ऑफर लेटर भी थमा दिए, जो फर्जी थे। राशि लेने के बाद ठगों के मोबाइल नंबर बंद हो गए थे।

ठग चुके हैं 2 करोड़ से अधिक राशि

एसपी भदौरिया ने बताया कि पीड़ित युवतियों की शिकायत के आधार पर ठगों के बंद हो चुके मोबाइल फोन की पुरानी कॉल डिटेल खंगाली गई और आरोपितों की पहले कुछ लोगों से हुई बातचीत के आधार पर उनके संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ा दी गई। फिर एसटीएफ ने बुधवार को गिरोह का सरगना जबलपुर निवासी दिलशाद खान और उसके साथी भोपाल निवासी आलोक कुमार बामने को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान पता चला है कि, ठगों का गिरोह अब तक 50 से अधिक लोगों से अभी तक 2 करोड़ से अधिक की राशि ठग चुका है।

5 पत्नियों का खर्च संभालने में असमर्थ

जानकारी के मुताबिक, दिलशाद की 5 पत्नियां हैं। सभी से एक-एक, दो-दो बच्चे भी हैं। जैसे-जैसे 5 पत्नियों वाला परिवार बढ़ने लगा तो दिलशाद घर चलाने में असमर्थ हो गया। पांचों बीवियों के महंगे शौकों के चलते उसके परिवार की गाड़ी पटरी से उतरती चली गई। फिर दिलशाद ने अपने परिवार को चलाने के लिए ठगी करना शुरू कर दिया। दिलशाद के साथी आलोक बामने की पत्नी भोपाल के पटेल नगर स्थित शासकीय कन्या छात्रावास में अधीक्षिका है। इस मामले में एसटीएफ आलोक की पत्नी की भूमिका की भी जांच कर रही है। गुरुवार को दोनों आरोपितों को कोर्ट में पेश कर उनसे पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की जाएगी।

कॉल कर युवतियों को देते थे नौकरी का झांसा

पूछताछ के दौरान सामने आया कि दिलशाद पिछले करीब आठ महीने में 50 से ज्यादा युवतियों को ठग चुका है। उसने किसी से चार तो किसी से छह लाख रुपए तक ऐंठे हैं। गिरोह नर्सिंग क्लास चलाने वाले इंस्टीट्यूट से ऐसी युवतियों की लिस्ट ले लेते थे, जो जल्द ही पास आउट हो रही हों। फिर वे एक-एक को कॉल करके उन्हें एम्स में भर्ती दिलाने का लालच देते थे। ऐसे में बेरोजगार होने के कारण और इतने बड़े संस्थान में काम करने के लालच से ज्यादातर युवतियां आरोपितों के झांसे में आ जाती थीं।

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