अपनी और सात पीढ़ियों के मोक्ष के लिए इस व्यक्ति ने खर्च किए 21 लाख और दान की 7 बीघा जमीन

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चैतन्य भारत न्यूज

झाबुआ. एक व्यक्ति ने अपने और अपनी सात पीढ़ियों की मोक्ष की प्राप्ति के लिए गांव में भव्य मंदिर बनवाने का संकल्प लिया। वह खुद तो कच्चे घर में रहता है लेकिन भगवान की मूर्ति एक भव्य मंदिर में स्थापित करना चाहता है। अपने इस संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने मंदिर के एक बीघा जमीन और पुजारी के लिए छह बीघा जमीन दान कर दी।


21 लाख की आईं मूर्तियां 

यह संकल्प घुघरी गांव के रहने वाले भगवान सिंह सक्तावत ने लिया। उनकी इच्छा थी कि उनके गांव में भी महाकाल मंदिर धाम और शनि धाम बने। फिर उन्होंने अपनी और सात पीढ़ियों के मोक्ष के लिए मंदिर बनवाने का फैसला लिया। भगवान सिंह ने मंदिर के लिए फोरलेन के पास स्थित अपनी एक बीघा जमीन दान कर दी। पुजारी के भरण-पोषण के लिए वह पहले ही अपनी छह बीघा जमीन दान कर चुके हैं। मूर्तियों की स्थापना के लिए वे 21 लाख रुपए घर की पूंजी लेकर 600 किमी दूर राजस्थान के मकरानी शहर गए थे।

 

दर्शन के लिए लगा भक्तों का तांता 

गुरुवार को तीन ट्रकों में राजस्थान से 24 मूर्तियां गांव पहुंची। गांववालों ने ढोल-ढमाकों और आतिशबाजी के साथ उनका स्वागत किया। मूर्तियों का वजन 8 से 12 क्विंटल तक था। इसलिए इन्हें उतारने के लिए राजस्थान से 15 सदस्यों की टीम आई। इतना ही नहीं बल्कि इन मूर्तियों को ट्रक से उतारने के लिए क्रेन का सहारा लेना पड़ा। फिलहाल सभी मूर्तियां गांव की एक विशेष कुटिया में सुरक्षित रखी गईं हैं। उनके दर्शन के लिए रोजाना भक्तों का तांता लगा रहता है।

नहीं चाहिए नाम

भगवान सिंह ने कहा कि, जनसहयोग से राशि जुटाकर वह जल्द से जल्द मंदिर का निर्माण शुरू करवा देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि, वह गरीब परिवार से हैं। उनका खुद का घर कच्चा है। मंदिर के लिए अब तक 24 मूर्तियां आ चुकी हैं और 33 मूर्तियां अभी और आना बाकि हैं। भगवान सिंह के मुताबिक, मंदिर या वहां की किसी भी मूर्ति पर उनके या उनके परिवार के किसी भी सदस्य का नाम नहीं लिखाया जाएगा। यह मंदिर सार्वजनिक होगा और इसमें सभी लोग आ सकते हैं।

इन देवी-देवताओं की मूर्तियां आईं

गणेशजी, एकलिंगनाथजी शिवलिंग, नंदी, कछुआ, पृथ्वीदेवी, मां महाकाली, महाकाली माता, बाणेश्वरी माता, नागणेचा माता, साडू माता, नौ ग्रह शनि देव, शुक्रदेव, सूर्यदेव, राहुदेव, केतुदेव, मंगलदेव, बुद्धदेव, बृहस्पतिदेव, चंद्रदेव, नागदेव, नागीन माता, बालाजी और शनि देवदायी की संगमरमर की 24 मूर्तियां लाई गईं हैं।

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