ये है देश का मोस्ट वॉन्टेड खूंखार अपराधी, दाऊद से ज्यादा है इसके ऊपर इनाम, कर सकता है सरेंडर

चैतन्य भारत न्यूज

तेलांगना के अंदर जब भी कहीं पर कोई बड़ा माओवादी हमला होता है या फिर किसी की हत्या होती है तो एक नाम अचानक से सभी की जुबान पर अपने आप ही चला आता है और वो है मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ ‘गणपति’। देश का सबसे खूंखार माओवादी नेता गणपति। जी हां… ये वही गणपति है जिसके नाम से तेलांगना के लोग थर-थर कांपते हैं। गणपति देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा है इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि दुनिया के मोस्ट अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से ज्यादा का इनाम इसके सिर पर रखा गया था। अब कहा जा रहा है कि ये माओ नेता जल्द ही तेलंगाना पुलिस के आगे सरेंडर कर सकता है। आइए जानिए हैं कौन है गणपति और कितना खतरनाक है यह व्यक्ति।

आखिर कौन है ये गणपति

मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ ‘गणपति’ एक माओवादी नेता है। उसकी मौत के बारे में कई बार खबरें आ चुकी हैं लेकिन हर बार किसी बड़ी माओवादी घटना के बाद फिर से उसका नाम उछल आता है। गणपति तेलंगाना के करीमनगर जिले में पैदा हुआ था और पेशे से टीचर था। वो बेहद कम उम्र से ही किसी बदलाव के लिए लोगों से जुड़ने में यकीन रखता था। इसी सोच के साथ गणपति ने अपना पेशा छोड़ा और माओ आंदोलन का लीडर बन गया। गणपति की पहुंच देश- विदेश में थी। उसने श्रीलंका में लिट्टे और फिलीपींस जैसे अन्य देशों में विद्रोही समूहों से संपर्क कर रखा था। यहां से उसे अपने अभियान के लिए रसद और हथियार जैसी चीजें मिलती रहीं।

2.5 करोड़ से ज्यादा का इनाम

गणपति सीपीआई (माओवादी) का पूर्व महासचिव भी रहा है। उसकी तलाश आज छत्तीसगढ़ से लेकर महाराष्ट्र, उड़ीसा, झारखंड, बिहार तक की पुलिस को है। देश की सबसे बड़ी सुरक्षा एजेंसी नेशनल इंवेस्टगेशन एजेंसी NIA (National Investigation Agency) को भी गणपति की कब से तलाश है। हर राज्य ने अपने-अपने स्तर से इस माओ नेता पर अलग-अलग इनाम रखे है। यदि देशभर में गणपति के उपर रखे गए इनाम की कुल राशि की बात करें तो ये आंकड़ा 2.5 करोड़ रुपए से ज्यादा ही है और इस तरह गणपति देश का सबसे बड़ा इनामी अपराधी बन गया है।

सालों पहले देखा गया था असली चेहरा

74 साल के गणपति के असली चेहरे को कई सालों पहले देखा गया है। वो दुबला-पतला और मंझोले कद का है, जिसके बालों में सफेदी है। गणपति बालों को रंगने का शौकीन है। कहा जाता है कि उसे बेहद जांबाज और जंगलों-पहाड़ों में लड़ाई लड़ने में तेज गुरिल्ला गार्ड्स की सुरक्षा मिली हुई है। यहां तक कि वो कई परतों की सुरक्षा में घिरा रहता है, जैसी देश के बड़े-बड़े राजनेताओं को मिलती है। ऐसे में सुरक्षा घेरा तोड़कर उस तक पहुंच पाना आसान नहीं रहा। उसने पास मुखबिरों की अपनी फौज भी थी। इससे उस तक पहुंचने की कोई कोशिश कामयाब नहीं हो पाती थी।

DSP और पुलिस की गाड़ी को बम से उड़ा दिया था

साल 1995 में वो पहली बार तब चर्चा में आया था, जब उसने एक DSP समेत पुलिस की गाड़ी को बम से उड़ा दिया। उस हमले में अधिकारी समेत 25 लोग घटनास्थल पर ही मारे गए थे। इसके बाद गणपति ने साल 2006 में सलवा जुडूम अभियान का मुकाबला करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ बस्तर के एर्राबोर क्षेत्र में 35 आदिवासियों की बेरहमी से हत्या कर दी। फिर साल 2006 में ही उसने उपलेटा कैंप में 22 पुलिसकर्मियों की हत्या की थी और 14 नागा सैनिकों को ले जा रहे एक वैन का उड़ा दिया था। वर्ष 2008 में उसने सीआईएसएफ के हिरोली माइंस कैंप पर हमला किया जिसमें आठ जवान मारे गए थे।

सरेंडर की बात से खुश कई पुलिस अधिकारी

कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गणपति के सरेंडर करने की बात से खुश हैं। बस्तर में इंस्पेक्टर जनरल ऑप पुलिस पी सुंदर राज के मुताबिक, गणपति पिछले 25 सालों से बस्तर में माओ आंदोलन की जड़ें फैलाने की कोशिश में था। अब अगर वो सरेंडर कर देता है तो इससे अभियान कमजोर होगा। साथ ही पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद वो कई खूंखार हमलों की जानकारी दे सकेगा।

Related posts