संयम, साधना और तप के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है मार्गशीर्ष अमावस्या, यहां जानिए पूजा-विधि

margashirsha amavasya 2019,margashirsha amavasya ka mahatava

चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष अमावस्या को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इस दिन तीर्थस्नान, जप, तप और व्रत के पुण्य से कर्ज और पापों से मुक्ति मिलती है। यह अमावस्या संयम, साधना और तप के लिए भी श्रेष्ठ मानी जाती है। इस बार मार्गशीर्ष अमावस्या 26 नवंबर को पड़ रही है। आइए जानते हैं इस मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व और पूजन-विधि।



margashirsha amavasya 2019,margashirsha amavasya ka mahatava

मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व

मार्गशीर्ष अमावस्या को पितरों की पूजा करने का विशेष दिन माना गया है। कहते हैं यदि किसी की कुंडली में पितृ दोष हो, संतान हीन योग बन रहा हो तो ऐसे लोगों को मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन उपवास जरूर रखना चाहिए। उन्हें विशेष लाभ होता है। मान्यता है कि इस दिन पूजन और व्रत करने से हमारे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष दूर होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। शास्त्रों के मुताबिक, अगहन माह में ही भगवान कृष्ण ने गीता का ज्ञान दिया था, जिसके चलते इस महीने की अमावस्या तिथि को अत्यधिक लाभकारी और पुण्य फलदायी मानी जाती है।

margashirsha amavasya 2019,margashirsha amavasya ka mahatava

मार्गशीर्ष अमावस्या पूजन-विधि

  • मार्गशीर्ष अमावस्या पर संभव हो तो नदी में स्नान करें इसे पुण्य फलदायी माना जाता है।
  • इस दिन व्रत रखकर श्री सत्यनारायाण भगवान की पूजा व कथा सुननी चाहिए।
  • अमावस्या के दिन पूजन सामग्री को लेकर पीपल के पेड़ के पास जाएं।
  • इसके बाद पीपल की जड़ में लक्ष्मी-नारयण की स्थापना करके दूध/जल अर्पित करें। फिर पीपल की जड़ में सूत लपेटें।
  • पूजा के दौरान भगवान को फूल, अक्षत अर्पित करके चंदन लगाएं और और कथा सुनें।
  • पूजा के बाद पेड़ के चारो ओर ‘ओम नम: भगवते वासुदेवाय’ का मंत्र बोलते हुए 108 बार परिक्रमा करें।

ये भी पढ़े…

गुरुवार को इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा, घर में आएगी सुख-समृद्धि

अनंत सूत्र से होता है भगवान विष्णु का पूजन, जानिए इसका महत्व और पूजा-विधि

तो इसलिए गुरूवार को भगवान विष्णु के साथ की जाती है केले के पेड़ की पूजा

Related posts