आज है मार्गशीर्ष व्रत पूर्णिमा, जानिए इसका महत्व और पूजन-विधि

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चैतन्य भारत न्यूज

पूर्णिमा तिथि को हिंदू धर्म में बहुत ही खास माना जाता है। जो कि हिंदू पंचांग के अनुसार पूर्णिमा शुक्लपक्ष की 15वीं तिथि को होती है। इस दिन चंद्रमा आकाश में पूर्ण रूप से दिखाई देता है इसलिए इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है। 11 दिसंबर को श्री दत्तात्रेय जयंती और व्रत की पूर्णिमा है। वहीं 12 दिसंबर को स्नान-दान की पूर्णिमा है। आइए जानते हैं व्रत पूर्णिमा का महत्व और पूजन-विधि।



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व्रत पूर्णिमा का महत्व

पूर्णिमा व्रत का महत्व इसलिए अधिक होता है क्योंकि चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है और इस दिन चंद्रमा अपने पूरे रूप में आकाश में दिखाई देते हैं और इस दिन जातकों के मन पर चंद्रमा का बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। मान्यता है कि, इस व्रत को करने से मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और पारिवारिक में कलह और अशांति दूर होती है। इस दिन शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बेलपत्र, शमी पत्र आदि चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा व्यक्ति पर सदैव बनी रहती है।

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व्रत पूर्णिमा पूजा-विधि

  • सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर की सफाई करें।
  • इसके बाद भगवान शिव या माता लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं, धूप करें और व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद गंगाजल से स्नान कराकर अक्षत और रोली से तिलक लगाएं।
  • शाम के समय चंद्रमा निकलने पर मिट्टी के दिएं जलाएं।
  • इसके बाद गाय के दूध में चावल की खीर बनाकर छोटे बर्तनों में भरकर छलनी से ढककर चंद्रमा की रोशनी में रख दें।
  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके उस खीर को मां लक्ष्मी को अर्पित करें।
  • प्रसाद रूप में वह खीर घर-परिवार के सदस्यों में बांट दें।

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