आज है मासिक शिवरात्रि, जानिए इसका महत्व, नियम और पूजा-विधि

चैतन्य भारत न्यूज

आज मासिक शिवरात्रि है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा होती है। मान्यता है कि, शिवरात्रि के दिन जो भी भक्त भगवान शिव की पूजा सच्चे मन से करता है उसे सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान शिव की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ की जाती है। आइए जानते हैं मासिक शिवरात्रि का महत्व, पूजा विधि और नियम।

मासिक शिवरात्रि का महत्व

हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि का अपना अलग ही महत्व है। इस दिन व्रत और भगवान शिव की आराधना करने से मनोमनाएं पूरी होती हैं। मान्यता है कि, कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं। शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी, इंद्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती ने भी शिवरात्रि का व्रत करके भगवान शिव का पूजन किया था। इस दिन व्रत करने से विवाह में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं।

मासिक शिवरात्रि की पूजा-विधि

  • सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े धारण कर शिवलिंग का रुद्राभिषेक जल, शुद्ध घी, दूध, शकर, शहद, दही आदि से करें।
  • पूजा के दौरान भगवान शिव की धुप, दीप, फल और फूल आदि से पूजा करें।
  • शिवरात्रि व्रत में उपवास या फलाहार की मान्यता है।
  • शिवरात्रि के दिन रात में भी जागरण करना चाहिए। इस दौरान ‘ऊं नम: शिवाय’ का जाप करते रहें।
  • इस दिन शिव चालीसा, शिव पुराण, रूद्राक्ष माला से महामृत्युंज्य मंत्र का जाप करने से भी भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।

मासिक शिवरात्रि के नियम

  • ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक, शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए कभी भी काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
  • शिवलिंग की पूजा करते समय भूलकर भी सिंदूर, तिल और हल्दी नहीं चढ़ना चाहिए।
  • शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय गलती से भी तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए। शास्त्रों में इसे वर्जित माना गया है।

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