मासिक शिवरात्रि पर बन रहा है विशेष संयोग, शिव पूजन से पूरी होंगी सारी मनोकामनाएं

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चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का काफी महत्व है। इस बार मासिक शिवरात्रि पर बेहद ही खास संयोग बन रहा है। दरअसल इस बार अगस्‍त माह में मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत (कृष्‍ण) एक ही दिन हैं। 28 अगस्‍त यानी आज के ही दिन इन दोनों व्रतों को किया जाएगा। मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव खुश होते हैं और सभी समस्याओं को दूर करते हैं।

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वहीं शिवरात्रि के व्रत का भी एक अपना ही महत्व है। ऐसे में मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का साथ आना बहुत लाभदायक है। प्रदोष मुख्य रूप से पुत्र प्राप्ति की कामना के लिए भी किया जाता है। आइए जानते हैं मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत की पूजा-विधि।

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शिवरात्रि और प्रदोष व्रत की पूजा-विधि

  • इस दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए और साफ-सफाई सहित स्नानादि के बाद पूजा की तैयारी शुरू करनी चाहिए।
  • इसके बाद पूजा घर में भगवान शंकर के सामने आसन लगाकर बैठे और व्रत का संकल्प लें।
  • प्रदोष व्रत की आराधना करने के लिए कुशा के आसन का प्रयोग किया जाता है।
  • पूजन की तैयारियां करके उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठकर भगवान शंकर का पूजन करना चाहिए।

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  • पूजा के दौरान शिव के मंत्र ‘ऊँ नम: शिवाय’ का जाप करते हुए शिव को जल चढ़ाना चाहिए।
  • पूजा में बेल पत्र, धतुरा, फूल, मिठाई, फल आदि का उपयोग करें।
  • इसके बाद शाम के समय एक बार फिर से स्नान आदि करें और महादेव की पूजा-अर्चना करें।

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