महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन, एंबुलेंस का इंतजार करता रहा पार्थिव शरीर, गुमनामी में बिता अंतिम समय

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चैतन्य भारत न्यूज

जाने माने गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने गुरुवार (14 नवंबर) को पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में अंतिम सांस ली। वह 74 वर्ष के थे। बताया जा रहा है कि नारायण सिंह पिछले कई सालों से सीजोफ्रेनिया नामक बीमारी से पीड़ित थे और लंबे समय से उनका पटना के पीएमसीएच अस्पताल में इलाज चल रहा था। आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती देने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह की योग्यता का डंका देशदुनिया में बजा।



समय पर नही मिली एबुंलेंस

जानकारी के मुताबिक, आज तड़के उनके मुंह से खून निकलने लगा। जिसके बाद उन्हें तत्काल परिजन पीएमसीएच लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि वशिष्ठ नारायण सिंह की मृत्यु के 2 घंटे तक उनकी लाश अस्पताल के बाहर पड़ी रही। 2 घंटे के इंतजार के बाद एबुंलेंस उपलब्ध कराया गया।

भोजपुर के रहने वाले थे नारायण सिंह 

बता दें कि वशिष्ठ नारायण सिंह मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले थे। वह बचपन से ही होनहार छात्र थे। उन्होंने गणित से जुड़े कई फॉर्मूलों पर शोध भी किया था। वे पटना साइंस कॉलेज में पढ़ रहे थे कि तभी उनकी किस्मत चमकी और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन कैली की नजर उन पर पड़ी जिसके बाद वशिष्ठ नारायण 1965 में अमेरिका चले गए और वहीं से 1969 में उन्होंने पीएचडी की थी। वह पांच भाई- बहन थे। उनका बचपन काफी गरीबी में बीता।

जी रहे थे गुमनामी की जिंदगी

नारायण सिंह साल 1974 में मानसिक बीमारी (सीजोफ्रेनिया) के कारण अस्पताल में भर्ती किए गए थे। बाद में 1989 में वे गढ़वारा (खंडवा) स्टेशन से लापता हो गए। फिर, 7 फरवरी 1993 को छपरा के डोरीगंज (छपरा) में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर प्लेट साफ करते मिले। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी सुध ली। उन्हें विमहांस बेंगलुरु इलाज के लिए भेजा गया। जहां मार्च 1993 से जून 1997 तक इलाज चला। इसके बाद से वे गांव में ही रह रहे थे। खबरों के मुताबिक, बीते साल अक्टूबर में उन्‍हें पीएमसीएच के आइसीयू में भर्ती कराया गया। आज फिर तबीयत बिगड़ने पर उन्‍हें पीएमसीएच लाया गया था।

राजकीय सम्‍मान के साथ होगा अंतिम संस्‍कार

वशिष्‍ठ नारायण सिंह के निधन से उनके पैतृक घर पर शोक का माहौल है। जानकारी के मुताबिक, शव को उनके पटना स्थित आवास से भोजपुर जिला मुख्‍यालय स्थित प्रंखड के बसंतपुर गांव स्थित उनके घर ले जाया जाएगा, जहां राजकीय सम्‍मान के साथ उनका अंतिम संस्‍कार होगा। इसके लिए राज्‍य सरकार ने विशेष पत्र जारी किया है।

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