मथुरा: रामलला के बाद जन्मभूमि का मालिकाना हक मांगने ‘श्रीकृष्ण विराजमान’ पहुंचे कोर्ट, औरंगजेब ने मंदिर की जगह बनाई थी मस्जिद

चैतन्य भारत न्यूज

मथुरा. अयोध्या मामले में विजयी हुए रामलला विराजमान के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण विराजमान ने भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। श्रीकृष्ण विराजमान नाम से मथुरा की कोर्ट में एक सिविल मुकदमा दायर कर 13.37 एकड़ जमीन का मालिकाना हक मांगा गया है। इतना ही नहीं बल्कि शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की भी अपील की गई है।

ये वाद भगवान श्रीकृष्ण विराजमान, कटरा केशव देव खेवट, मौजा मथुरा बाजार शहर द्वारा उनकी अंतरंग सखी के रूप में अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य भक्तों ने दाखिल किया है। बताया गया है कि मथुरा के कटरा केशव देव की 13. 37 एकड़ जमीन में से 2 बीघा जगह पर शाही ईदगाह मस्जिद ट्रस्ट गैरकानूनी तरीके से काबिज है। उसने वहां मस्जिद बना रखी है। यहीं वह जगह है जो भगवान कृष्ण का असल जन्म स्थान है।

अखाड़ा परिषद ने उठाई थी मांग

बता दें अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आने के बाद से ही एक पक्ष अब काशी और मथुरा के मामले में भी लगातार लामबंदी कर रहा है। इसी क्रम अभी कुछ दिन पहले प्रयागराज में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक में साधु-संतों ने मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर चर्चा की थी। इसमें संतों ने काशी-मथुरा के लिए लामबंदी शुरू करने की कोशिश की।

औरंगजेब ने मंदिर की जगह बनाई मस्जिद

याचिका के मुताबिक, हजारों सालों से मौजूद श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कई राजाओं ने अलग-अलग मंदिर बनवाए या पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार किया। 1616 में ओरछा के राजा वीर सिंह देव बुंदेला ने उस जगह पर 33 लाख रुपए की लागत से भव्य मन्दिर बनवाया। 1658 में औरंगजेब शहंशाह बना, अपनी कट्टर इस्लामी फितरत के चलते उसने हिंदू मंदिरों और धार्मिक स्थानों के विध्वंस का आदेश दिया। जनवरी 1670 में मुगल फौज ने मथुरा पर हमला कर दिया और मंदिर का काफी हिस्सा गिरा कर वहां एक मस्जिद बना दी। मंदिर की मूर्तियों को आगरा ले जाकर बेगम शाही मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दफन कर दिया। ताकि नमाज के लिए जाते मुसलमान हमेशा उन्हें रौंदते हुए जाएं। यह सब कुछ खुद मुगल रिकॉर्ड में दर्ज है। दरबार में काम कर रहे लोगों के लेख में भी यह बातें उपलब्ध हैं।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि का इतिहास

  • जिस जगह पर आज कृष्ण जन्मस्थान है, वह पांच हजार साल पहले मल्लपुरा क्षेत्र के कटरा केशव देव में राजा कंस का कारागार हुआ करता था। इसी कारागार में रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था।
  • इतिहासकार डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल ने कटरा केशवदेव को ही कृष्ण जन्मभूमि माना है। विभिन्न अध्ययनों और साक्ष्यों के आधार पर मथुरा के राजनीतिक संग्रहालय के दूसरे कृष्णदत्त वाजपेयी ने भी स्वीकारा कि कटरा केशवदेव ही कृष्ण की असली जन्मभूमि है।
  • इतिहासकारों के अनुसार, सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य द्वारा बनवाए गए इस भव्य मंदिर पर महमूद गजनवी ने सन 1017 ई. में आक्रमण कर इसे लूटने के बाद तोड़ दिया था।
  • श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर तीन बार तोड़ा और चार बार बनाया जा चुका है। अभी भी कृष्ण जन्मभूमि पर मालिकाना हक के लिए दो पक्षों में विवाद चल रहा है।
    अगस्त माह में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए श्रीकृष्ण जन्मभूमि निर्माण न्यास का गठन किया गया है। इस न्यास से देश के 14 राज्यों के 80 संतों को जोड़ा गया है। न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य देवमुरारी बापू ने बताया था कि ट्रस्ट 23 जुलाई हरियाली तीज को रजिस्टर्ड कराया गया है।

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