मौनी अमावस्या पर क्यों रखा जाता है मौन व्रत? पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए करें ये उपाय

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चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म में स्नान, दान और ध्यान का बड़ा महत्व होता है। खासतौर पर माघ के महीने में आने वाली मौनी अमावस्या पर तो ये और भी ज्यादा फलदायी होता है। ऐसी मान्यता है कि अगर इस अमावस्या पर मौन रहें तो इससे अच्छे स्वास्थ्य और ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस बार मौनी अमावस्या 11 फरवरी को पड़ रही है। आइए जानते हैं मौनी अमावस्या का महत्व और स्नान के नियम।



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मौनी अमावस्या का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिल जाती है। मौनी अमावस्या पर किए गए दान-पुण्य का फल सौ गुना ज्यादा मिलता है। कहा जाता है कि इस दिन गंगा का जल अमृत से समान होता है। मौनी अमावस्या को किया गया गंगा स्नान अद्भुत पुण्य प्रदान करता है। मौनी अमावस्या पर मौन रहकर स्नान और दान करने से इंसान के कई जन्मों के पाप मिट जाते हैं।

मौनी अमावस्या के दिन ऐसे करें पितृ पूजन

पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए इस दिन पितरों का ध्यान करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें। पितृ दोष निवारण के लिए लोटे में जल लें और इसमें लाल फूल और सा काले तिल डालें। इसके बाद अपने पितरों की शांति की प्रार्थना करते हुए सूर्य देव को ये जल अर्पित करें। पीपल के पेड़ पर सफेद रंग की कोई मिठाई चढ़ाएं और उस पेड़ की 108 बार परिक्रमा करें। मौनी अमावस्या के दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, कंबल और वस्त्र जैसी चीजें जरूर दान करें। ऐसा करने से आपको पुण्य मिलेगा।

स्नान के नियम

  • मौनी अमावस्या पर किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें।
  • स्नान के दौरान आठ या नौ डुबकी लगाए।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
  • तिल मिले हुए जल से सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • पितरों के लिए प्रार्थना करें।
  • इस दिन तिल, तेल, कंबल, कपड़े और धन का दान करना चाहिए।

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