पुण्यतिथि विशेष: घोड़े की नाल बनाने वाले से फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने तक का सफर, ऑस्कर मिलने से चुक गई थी महबूब खान की ‘मदर इंडिया’

mehboob khan death anniversary

चैतन्य भारत न्यूज

फिल्म निर्देशक महबूब खान की आज 57वीं बरसी है। आज ही के दिन साल 1964 को उन्होंने इस इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनके टैलेंट का लोहा पूरी दुनिया ने माना था। अपनी अद्भुत कला के माध्यम से उन्होंने भारतीय सिनेमा का परिचय विदेश से करवाया। आइए जानते हैं उनके बारे में खास बातें-

एक्टर बनने के लिए 16 साल की उम्र में घर से भागे

महबूब खान का जन्म 9 सितंबर, 1907 को गुजरात के बिलिमोड़ा शहर में हुआ था। बेहद कम लोग ही ये बात जानते होंगे कि महबूब खान को निर्देशक नहीं बल्कि एक एक्टर बनने का शौक था। 16 साल की उम्र में वे घर से भागकर एक्टिंग करने के लिए मुंबई आ गए थे। लेकिन जब उनके पिता को इस बारे में पता चला तो वे महबूब को वापस घर ले आए। लेकिन फिर भी एक्टर बनने का सपना उनके मन में था। समय बीतता गया। जब महबूब 23 साल के हुए तो फिल्म इंडस्ट्री के एक जानकार संग मुंबई आ गए और तबेले में घोड़ों की नाल ठोंकने का काम करने लगे।

 

इत्तेफाक से हुई निर्देशन की शुरुआत

महबूब खान के फिल्मों में निर्देशन की शुरुआत भी इत्तेफाक से हुई। दरअसल एक बार महबूब एक साउथ फिल्म की शूटिंग सेट पर चले गए। उस फिल्म का निर्देशन चंद्रशेखर कर रहे थे। महबूब ने वहां जाकर उनके साथ काम करने की इच्छा जताई जिस पर उन्हें डायरेक्टर की रजामंदी भी मिल गई। लेकिन महबू का छोटा सा ही रोल मिला। इसके बाद धीरे-धीर उन्हें सपोर्टिंग रोल्स ही मिले। ये बात उस दौर की है जब इंडस्ट्री में साइलेंट फिल्में चलती थीं।

‘आलम आरा’ में मिला था लीड रोल

भारत में पहली बोलती फिल्म ‘आलम आरा’ बन रही थी तो उस फिल्म के लीड रोल के लिए फिल्म के निर्देशक अर्देशिर ईरानी ने महबूब खान को ही पहले कास्ट किया था। लेकिन कई लोगों ने अर्देशिर को सलाह दी कि पहली फिल्म है, इसमें ज्यादा एक्सपेरिमेंट करना ठीक नहीं है। इसके बाद फिल्म में रोल एक्टर विट्ठल को मिल गया।

महिलाओं के सम्मान के प्रति खास झुकाव

महबूब खान ने 30 साल के करियर में कुल 24 फिल्मों का निर्देशन किया था। ‘मदर इंडिया’ इनमें से सबसे ज्यादा चर्चा में रही। इसके अलावा ‘वतन’, ‘औरत’, ‘बहन’, ‘तकदीर’, ‘अनमोल घड़ी’, ‘अंदाज’, ‘आन’ और ‘अमर’ जैसी बेहतरीन फिल्में बनाई। उनकी फिल्मों में महिलाओं के सम्मान के प्रति खास झुकाव होता था। महबूब खान हमेशा अपनी फिल्म ‘मदर इंडिया’ के लिए जाने जाते रहेंगे। उनकी ये फिल्म ऑस्कर की चौखट पर पहुंचकर चूक गई थी। वह अपनी फिल्मों के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीत चुके हैं। 28 मई, 1964 को 56 वर्ष की उम्र में महबूब खान का निधन हो गया था। हिन्दी सिनेमा के महान फिल्म मेकर महबूब खान को लोग उनकी फिल्मों के जरिए सदियों तक याद रखेंगे।

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