हैरतअंगेज: अंतरिक्ष में कई महीने रहने के बाद बॉडी बिल्डर बनकर वापस धरती पर लौटे चूहे

चैतन्य भारत न्यूज

वैज्ञानिकों ने कुछ चूहों को महीने भर के लिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में यह जानने के लिए भेजा था कि अंतरिक्ष यात्रियों के लंबे मिशनों के दौरान उनकी हड्डियों और मांसपेशियों को होनो वाली क्षति को रोकने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। अंतरिक्ष में एक महीना बीताने के बाद ये चूहे और ज्यादा ताकतवर और मांसपेशियों को मजबूत बना कर वापस लौटे हैं। वैज्ञानिकों ने सोमवार को बताया कि चूहों की मांसपेशियां किसी बॉडी बिल्डर जैसी हो गई हैं

बता दें यह एक खास तरह का प्रयोग था, जिसे कनेक्टिकट के जैक्सन लेबोरेट्री की रिसर्च टीम ने डॉक्टर जिन ली के नेतृत्व में किया गया। इसके लिए पिछले साल दिसंबर में स्पेसएक्स के रॉकेट के सहारे 40 काली मादा चूहों को अंतरिक्ष में भेजा गया था। ‘प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ में पब्लिश पेपर में इस बारे में जानकारी दी गई। ली ने बताया है कि, 24 चूहों को नियमित रूप से कोई दवा नहीं दी गई। बिना ग्रेविटी के रहते हुए उनकी मांसपेशियों और बोन मास में लगभग 18 फीसदी की कमी आई। लेकिन जेनेटिकली मोडिफाइड चूहों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

बता दें वैज्ञानिकों ने आनुवांशिक रूप से परिवर्तित किए गए आठ चूहों को भी अंतरिक्ष में भेजा था, जिन्हें ‘माइटी माइस’ कहा जा रहा है। इस प्रयोग से मिली जानकारियां अंतरिक्ष यात्राओं पर अंतरिक्ष यात्रियों में मांसपेशियों और हड्डियों के नुकसान को रोकने के साथ ही धरती पर व्हील चेयर और बिस्तर पर लंबा समय बिताने वाले मरीजों के लिए भी काम आएंगी।

जानकारी के मुताबिक, इन ताकतवर चूहों का वजन कम नहीं हुआ और मांसपेशियां दोगुनी हो गईं। इन चूहों के मांसपेशियों की तुलना अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर में रखे गए ताकतवर चूहों की मांसपेशियों से की गई। जिन आठ सामान्य चूहों को अंतरिक्ष में रखकर ताकतवर चूहों वाली दवाएं दी गईं, उनकी मांसपेशियां बहुत ज्यादा विकास हुई हैं। इन चूहों में मांसपेशियों का वजन सीमित करने वाले प्रोटीनों को दवा के जरिए रोका गया था।

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